20/03/2026
🌸 गणगौर महापर्व 2026 – अखंड सौभाग्य, प्रेम और समृद्धि का दिव्य उत्सव 🌸
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गणगौर व्रत सनातन धर्म के प्रमुख और अत्यंत पावन पर्वों में से एक है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि नारी शक्ति, श्रद्धा, समर्पण और वैवाहिक जीवन की पवित्रता का अद्भुत प्रतीक है। यह पर्व माता गौरी (पार्वती) और भगवान शिव (ईसर) के दिव्य मिलन को समर्पित है।
“गण” का अर्थ भगवान शिव और “गौर” का अर्थ माता पार्वती है। अतः गणगौर शिव-पार्वती के उस आदर्श संबंध का प्रतीक है, जिसमें प्रेम, विश्वास, त्याग और समर्पण की सर्वोच्च भावना निहित है।
यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है—
🔸 विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए
🔸 अविवाहित कन्याएं योग्य, संस्कारी और मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए
इस वर्ष गणगौर के पावन अवसर पर रवि योग का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है।
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📅 गणगौर पूजा तिथि एवं शुभ मुहूर्त
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फाल्गुन अमावस्या के पश्चात प्रारंभ होकर यह पावन उत्सव चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पूर्ण होता है।
🔸 तृतीया तिथि प्रारंभ: 21 मार्च 2026, प्रातः 02:31 बजे
🔸 तृतीया तिथि समाप्त: 21 मार्च 2026, रात्रि 11:57 बजे
👉 21 मार्च 2026, शनिवार को गणगौर व्रत एवं पूजा की जाएगी।
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🪔 गणगौर पूजा-विधि
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• स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
• ईसर-गौर की प्रतिमा स्थापित करें
• माता गौरी को सोलह श्रृंगार अर्पित करें
• भगवान शिव को बेलपत्र, जल, अक्षत अर्पित करें
• रोली, पुष्प, धूप-दीप से पूजा करें
• कथा सुनें, गीत गाएं
• आरती कर प्रसाद वितरित करें
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📿 पण्डित लोकेंद्र कृष्ण शर्मा (उज्जैन)
कर्मकांड, अंक ज्योतिष, हस्तरेखा, वास्तुविद, पुराण वक्ता एवं दोष शांति विशेषज्ञ
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