23/04/2024
भगवान महावीर के पाँच नामों पर आधारित पैंटिंग है।
वीर
इंद्र ने वीर नाम से सम्बोधित किया
वर्धमान
पिता राजा सिद्धार्थ ओर माता महारानी त्रिशला ने उनके आने से राज्य में नित्य वरद्दी देख वर्धमान नाम दिया।
महावीर
संगम नामक देव उनकी परीक्षा लेने आया ओर उनकी निडरता देख कहां तुम वीर ही नही महावीर हो।
सन्मति
संजय ओर विजय चारण रिद्धि धारी मुनिराज की शंकाओं के समाधान महावीर को देखकर स्वतः ही हो गये तो मुनिराजो ने उन्हें सन्मति नाम दिया।
अतिवीर
एकबार एक मदोन्मत्त हाथी गजशाला से निकल कर नगर में उत्पात मचा रहां था कि वीर को देख नतमस्तक हो गया । तब ग्रामवासी कहने लगे आप वीर ही नही अतिवीर हे ,अतिवीर हे।
इस प्रकार वे पाँच नामों से जाने जाते है।
तीर्थंकर भगवान के जन्म के पंद्रह माह पूर्व ही रत्न व्रशटी होने लगती है।
जन्म होते ही सोधर्म इंद्र का आसन कंपायमान होता है। अवधिज्ञान से उन्हें ज्ञात होता है कि तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ है तो इंद्र अपने आसन से उठकर सात कदम आगे आकर भगवान को साष्टांग नमस्कार करते है।
कल्पवासी देवों के यहाँ धन्टे बजते हैं। ज्योतिष देवों के यहाँ सिंहनाद होता है ।व्यंतर देवों के यहाँ भेरी बजती है। भवनवासी देवों के यहाँ शंखनाद होता है।सोधर्म इंद्र अपनी सात प्रकार की देव सेना के साथ सपरिवार आकर महल की जहाँ तीर्थंकर का जन्म हुआ है, तीन परिक्रमा करते हैं।
शची इंद्राणी मायामई बालक को माता के पास सुलाकर तीर्थंकर बालक को प्रसूति गृह से बाहर लाती है। सोधर्म इंद्र बालक को देख़कर मंत्रमुग्ध हो अपलक निहारते रह जाते हैं।फिर पांडुकशीला पर न्हवन के लिए ले जाते हैं। तब ईशानइंद्र उनके सिर पर छत्र लगाते हैं, सनत कुमार ओर माहेंद्र कुमार इंद्र चँवर ढुराते हैं। बाद में इंद्र आनंद ताण्डव नृत्य कर उत्सव मनाते हैं।इस प्रकार इंद्र भक्ति भाव पूर्वक बड़ी ही धूमधाम के साथ तीर्थंकर बालक का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाते हैं।