12/09/2026
संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी — श्री संतराम भंडारी जी
आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी शख्सियत की, जिनकी जिंदगी की शुरुआत ही संघर्षों से हुई, लेकिन अपनी मेहनत, लगन और हिम्मत के दम पर उन्होंने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि समाज, महेश्वर देवता और युवाओं के लिए भी अपना जीवन समर्पित किया।
हम बात कर रहे हैं श्री संतराम भंडारी जी की।
महज 5 वर्ष की उम्र में पिता का साया सिर से उठ गया। इतनी छोटी उम्र में परिवार की जिम्मेदारियों का सामना करना किसी भी इंसान के लिए आसान नहीं होता। इसके बावजूद उन्होंने संघर्ष करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी और बड़ी मुश्किलों के बीच दसवीं कक्षा पास की।
दसवीं के बाद करीब दो वर्षों तक रोजगार की तलाश जारी रही, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी दौरान भगवान की कृपा से उनके घर पर तत्कालीन माल ऑफिसर श्री शेर सिंह जी का आगमन हुआ। उन्होंने संतराम जी की प्रतिभा और काबिलियत को पहचाना, उन्हें सही मार्गदर्शन दिया और आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया।
इसी मार्गदर्शन के बाद वर्ष 1977 में संतराम भंडारी जी ने पटवारी के रूप में अपने सरकारी सेवाकाल की शुरुआत की और किन्नौर में नियुक्त हुए।
लेकिन नौकरी मिल जाना उनके संघर्ष का अंत नहीं था। उस दौर का किन्नौर, आज की तरह सुविधाओं से संपन्न नहीं था। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने पूरी मेहनत और ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। अलग-अलग स्थानों पर सेवाएं देते हुए वे आगे बढ़ते रहे और अंततः सितंबर 2015 को शिलाई से कानूनगो के पद से सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका सेवा भाव रुका नहीं।
महेश्वर देवता की सेवा उनके परिवार की पुरानी परंपरा रही है। उनके दादा जी ने उन्हें पहले ही भंडारी के रूप में नियुक्त कर दिया था, लेकिन निजी परिस्थितियों के कारण उन्होंने उस समय अपने चाचा जी को कार्यवाहक भंडारी के रूप में जिम्मेदारी दी। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पुनः महेश्वर देवता कमेटी में भंडारी के रूप में सेवा शुरू की।
आज वे महेश्वर देवता कमेटी में वित्तीय जिम्मेदारियों को संभालते हुए पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
लेकिन जिंदगी ने संतराम भंडारी जी को एक ऐसा दर्द दिया, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं।
2022 में उनकी जीवनसंगिनी Krishna Bhandari का अचानक निधन हो गया, और खुशियों के बीच एक बार फिर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
जिस साथी के साथ जिंदगी का हर सुख-दुख बांटा हो, उसका यूँ अचानक चले जाना बेहद गहरा आघात होता है।
बच्चों से माँ का साया और परिवार से एक अपना इंसान छिन जाना, इस दर्द को और भी गहरा कर गया।
फिर भी संतराम जी ने खुद को संभाला और टूटे हुए परिवार को सहारा देते हुए हिम्मत के साथ जिंदगी की राह पर आगे बढ़ते रहे।
NCC Mashrain के जाबल मैदान और वहां के खेलों से भी उनका पुराना रिश्ता रहा है। शुरुआती दौर में जब संसाधन बहुत कम थे, तब यहां कपड़े की गेंद से क्रिकेट खेला जाता था। बाद में लेदर बॉल क्रिकेट की शुरुआत हुई और संतराम जी उन शुरुआती खिलाड़ियों में रहे जिन्होंने यहां क्रिकेट की नींव मजबूत करने में योगदान दिया। वे उस समय टीम के प्रमुख गेंदबाजों में भी रहे।
आज भी उनका खेल और युवाओं के प्रति वही जुनून कायम है।
मैदान हो, खेल हो या गांव के युवाओं की बात—संतराम भंडारी जी हमेशा युवाओं को आगे बढ़ने और खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
हाल ही में Mashrain में आयोजित हुआ बड़ा क्रिकेट टूर्नामेंट भी उनके महत्वपूर्ण सहयोग से संभव हो पाया। करीब 10–15 वर्षों से जिस टूर्नामेंट का आयोजन नहीं हो पा रहा था, उसे दोबारा शुरू कराने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और चीफ पैट्रन के रूप में युवाओं का साथ दिया।
उनका आज भी यही संकल्प है—
“जो कुछ भी हमसे हो सकेगा, हम अपने युवाओं और अपने Mashrain के लिए हमेशा करते रहेंगे।”
ऐसी शख्सियतों की कहानी सामने आना इसलिए जरूरी है, क्योंकि ये केवल अपनी जिंदगी में सफल नहीं हुए, बल्कि इन्होंने अपने पीछे आने वाली पीढ़ी के लिए रास्ते भी बनाए हैं।
5 साल की उम्र में पिता को खोने वाले एक बच्चे से लेकर सरकारी सेवा, कानूनगो पद से सेवानिवृत्ति, महेश्वर देवता की सेवा और आज भी युवाओं व खेलों के लिए खड़े रहने तक—श्री संतराम भंडारी जी का जीवन अपने आप में संघर्ष, सेवा और समर्पण की एक प्रेरणादायक मिसाल है।
ऐसे लोगों को पहचान और सम्मान मिलना चाहिए, क्योंकि किसी क्षेत्र की असली पहचान सिर्फ उसकी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उन लोगों से होती है जिन्होंने उन उपलब्धियों की नींव रखी होती है।
🙏 श्री संतराम भंडारी जी को सादर नमन एवं हार्दिक सम्मान।
🏏 खेल • युवा • सेवा • संस्कार
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