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🏏 दशौह कप — एक नई शुरुआत 🏏🙏 जय महेश्वर महाराज जी 🙏महेश्वर महाराज जी के दशों के पूरे इलाके के सभी क्रिकेट प्रेमियों एवं ख...
02/10/2026

🏏 दशौह कप — एक नई शुरुआत 🏏

🙏 जय महेश्वर महाराज जी 🙏

महेश्वर महाराज जी के दशों के पूरे इलाके के सभी क्रिकेट प्रेमियों एवं खिलाड़ियों को सूचित किया जाता है कि “दशौह कप” क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन शिमला में करवाने का विचार है।

इस टूर्नामेंट में दशौह के पूरे इलाके की टीमें/खिलाड़ी भाग ले सकेंगे। टूर्नामेंट की शुरुआती इनामी राशि ₹1,51,000/- से रखी जाएगी।

📢 अभी टूर्नामेंट की तारीख और ग्राउंड फाइनल नहीं हुआ है।
आयोजन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, इसलिए सभी से राय एवं सहयोग अपेक्षित है।

👉 जो-जो टीम/खिलाड़ी “दशौह कप” में भाग लेना चाहते हैं, वे अपनी सहमति/नाम जरूर बताएं।

साथ ही आप सभी सुझाव दें कि:
• टूर्नामेंट किस तारीख/महीने में हो?
• कितनी टीमें शामिल की जाएं?
• टूर्नामेंट को बेहतर बनाने के लिए आपके क्या सुझाव हैं?

यह टूर्नामेंट किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि महेश्वर महाराज जी के पूरे दशौह इलाके का अपना टूर्नामेंट होगा। ❤️

आइए, मिलकर “दशौह कप” को एक यादगार क्रिकेट आयोजन बनाएं। 🏏

🙏 जय महेश्वर महाराज जी 🙏

🙏 जय महेश्वर देवता 🙏❤️ हमारे कुलिष्ट महाराज, हमारी आस्था और हमारी पहचान ❤️महेश्वर महाराज हमारे कुलिष्ट महाराज हैं। दशों ...
27/09/2026

🙏 जय महेश्वर देवता 🙏
❤️ हमारे कुलिष्ट महाराज, हमारी आस्था और हमारी पहचान ❤️

महेश्वर महाराज हमारे कुलिष्ट महाराज हैं। दशों क्षेत्र के अनेक गाँवों की आस्था और विश्वास महेश्वर देवता जी से जुड़ा हुआ है। शिला, पोड़न, थ्रोच, कंडहार, धनाड़ा, सुंदाणा, पोटनाड़ी, गोटाड़ी, सनोग, नगाह, लालों सहित आसपास के अनेक गाँव महेश्वर महाराज को अपना आराध्य मानते हैं। तथा सोलंग के लोगों के भी यह अराध्या है।

महेश्वर महाराज के प्रति भक्तों की आस्था सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि जब भक्त सच्चे मन से अपने देवता को याद करता है और पुकारता है, तो महेश्वर महाराज उसकी रक्षा और सहायता के लिए अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं। देवता का आशीर्वाद केवल गाँव तक सीमित नहीं, बल्कि जहाँ भी उनके भक्त रहते हैं, वहाँ तक उनकी कृपा बनी रहती है। 🙏

इसी आस्था और परंपरा को अपनी आवाज़ में खूबसूरती से प्रस्तुत किया है हमारे शिला गाँव के मुकेश सामटा जी ने। उन्होंने पहली बार महेश्वर महाराज पर एक बहुत ही सुंदर गीत गाया है, जिसमें हमारे देवता की महिमा और दशों क्षेत्र की श्रद्धा को शब्दों और सुरों में पिरोया गया है। ❤️🎶

हमारे महेश्वर महाराज के साथ जलारी माता की भी विशेष आस्था जुड़ी हुई है। जाबल में पचास वर्ष के बाद होने वाली जातर में हजारों लोगों देवता की पालकी की झलक पाने के लिए तथा आशिर्वाद प्राप्त करने के लिए उत्सुक थे । मशरांह में भी मेला आयोजित होता है। वहीं हमारी पुरानी परंपराओं और संस्कृति की झलक देखने को मिलती है।

तथा महेश्वर महाराज का जागरण हर 3 वर्ष बाद होता है जिसमें महेश्वर महाराज की पालकी दशौह क्षेत्र के हर एक गांव में जाती है यह लगभग 1 महीने तक चलता है जागरा लगभग एक महीने तक चलता है और क्षेत्र के विभिन्न गाँवों में देवता महाराज का विराजमान होना हमारी सदियों पुरानी परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, भाईचारे और पुरखों से मिली विरासत का जीवंत स्वरूप है।

मशराह की धरती पर महेश्वर महाराज के साथ नारसिंह वीर और काली माता की भी विशेष आस्था है। जाबल में नारसिंह वीर का पवित्र स्थान और मैदान भी हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहाँ जातर के अवसर पर लोग बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ एकत्रित होते हैं।

मशरांह का यह प्राचीन मंदिर और इससे जुड़ी परंपराएँ हमारे पूरे क्षेत्र की पहचान हैं। यहाँ आने वाला व्यक्ति चाहे खुशी में आए या किसी परेशानी में, देवता के आँगन में पहुँचकर मन को एक अलग ही शांति और विश्वास मिलता है। ❤️🙏

महेश्वर महाराज हमारे दिलों में बसे हैं।
उनकी कृपा और आशीर्वाद हम सभी भक्तजनों पर हमेशा बना रहे।
हमारी आने वाली पीढ़ियाँ भी इस महान परंपरा, संस्कृति और आस्था को इसी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ाती रहें। 🙏

जय महेश्वर देवता! 🚩
जय नारसिंह वीर! 🚩
जय काली माता! 🚩

❤️ महेश्वर महाराज की कृपा सब पर बनी रहे। ❤️

🏏🔥 BPL SEASON 2 — BLACK BOYS की दमदार टीम 🔥🏏BPL Season 2 की नीलामी में इस बार खिलाड़ियों पर जमकर बोली लगी। 💥⭐ सबसे महंगी...
23/09/2026

🏏🔥 BPL SEASON 2 — BLACK BOYS की दमदार टीम 🔥🏏

BPL Season 2 की नीलामी में इस बार खिलाड़ियों पर जमकर बोली लगी। 💥

⭐ सबसे महंगी बोली — हर्ष कायथ
💰 ₹1,30,000 में बिककर बने BPL Season 2 के Highest Bid Player 🔥

इसके अलावा चार खिलाड़ी ₹1,00,000-₹1,00,000 में बिके। यानी इस बार Black Boys ने अपनी टीम को मजबूत बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 💪🏏

🔥 बड़े नाम, बड़ी बोली और बड़ा मुकाबला…
अब मैदान में देखना होगा कि ये दमदार टीम BPL Season 2 में क्या कमाल करती है!

🖤🏏 BLACK BOYS — नाम ही काफी है! 🔥

🏏❤️ जाबल मैदान — Mashrain की शान, पहचान और अनगिनत यादों का गवाह ❤️🏏Mashrain में एक जगह है, जिसे लोग प्यार और गर्व से “जा...
20/09/2026

🏏❤️ जाबल मैदान — Mashrain की शान, पहचान और अनगिनत यादों का गवाह ❤️🏏
Mashrain में एक जगह है, जिसे लोग प्यार और गर्व से “जाबल” कहते हैं। यह सिर्फ एक मैदान नहीं, बल्कि पूरे गाँव की आन-बान-शान, शोभा और आने वाली पीढ़ियों की उम्मीद है। 🌿❤️

इस मैदान में न जाने कितने बच्चों का बचपन बीता है। किसी ने यहीं से क्रिकेट खेलना शुरू किया, किसी ने कबड्डी खेली और किसी ने इसी मैदान से अपनी मेहनत और खेल का सफर शुरू किया। NCC Mashrain के खिलाड़ियों की भी इस मैदान से अनगिनत यादें जुड़ी हुई हैं। 🏏🔥

एक समय ऐसा था जब खिलाड़ी सुबह 7–8 बजे ही मैदान में पहुँच जाते थे। घंटों अभ्यास चलता था। दोपहर को घर जाकर खाना खाते और फिर 3–4 बजे दोबारा जाबल मैदान में लौट आते थे। इसी मिट्टी पर पसीना बहाकर कई खिलाड़ियों ने अपनी पहचान बनाई और मशरांह का नाम रोशन किया।

जाबल मैदान सिर्फ खेल का मैदान नहीं है। यहाँ कुलिष्ट देवता नरसिंह वीर और काली माता की आस्था भी जुड़ी हुई है। इसी कारण यह भूमि गाँव के लिए बेहद पवित्र और खास मानी जाती है।

इस मैदान के साथ ही स्कूल भी है, इसलिए स्कूल के बच्चे भी यहीं खेलते हैं। कई बच्चों के खेल जीवन की पहली शुरुआत इसी मैदान से होती है। पढ़ाई के साथ खेल का यह संगम आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी बात है। 🏫🏏

यहाँ समय-समय पर क्रिकेट टूर्नामेंट और अन्य खेल गतिविधियाँ होती रहती हैं। साथ ही हमारी पुरानी परंपराओं से भी इस मैदान का गहरा रिश्ता है। लगभग 50 साल बाद होने वाली जातर भी इसी मैदान में आयोजित होती है, जब पूरा गाँव एक साथ जुटता है और जाबल मैदान आस्था, खुशी और मिलन का केंद्र बन जाता है। 🙏❤️

किसी बाहरी व्यक्ति के लिए यह सिर्फ एक मैदान हो सकता है, लेकिन मशरांह के लिए जाबल एक भावना है। यहाँ किसी का बचपन है, किसी की पहली जीत है, किसी की हार से मिली सीख है, किसी की मेहनत है और हजारों ऐसी यादें हैं जिन्हें शब्दों में पूरी तरह बयां करना मुश्किल है। ❤️

🌿 जाबल मैदान मशरांह के लिए सच में चाँद का टुकड़ा है।

जिस मैदान की मिट्टी में हमारी पीढ़ियों का बचपन, मेहनत, खेल और आस्था बसी हो—उस मैदान को सिर्फ मैदान नहीं, गाँव की विरासत कहा जाता है। ❤️🏏

जय महेश्वर देवता,🙏
जय नरसिंह वीर 🙏
जय काली माता 🙏
जय मशरांह ❤️

इन पहाड़ों में कुछ तो बात है,हर नज़ारा अपनेपन का एहसास है।शहरों में ढूँढते हैं लोग सुकून जहाँ,वो सुकून मेरे गाँव की हवाओ...
17/09/2026

इन पहाड़ों में कुछ तो बात है,
हर नज़ारा अपनेपन का एहसास है।
शहरों में ढूँढते हैं लोग सुकून जहाँ,
वो सुकून मेरे गाँव की हवाओं के पास है। 🏔️🌿❤️

🏏 आज बात करते हैं NCC मशरहां के एक ऐसे दमदार खिलाड़ी की, जिनका योगदान शायद उतना चर्चित नहीं रहा, जितना होना चाहिए था।हम ...
16/09/2026

🏏 आज बात करते हैं NCC मशरहां के एक ऐसे दमदार खिलाड़ी की, जिनका योगदान शायद उतना चर्चित नहीं रहा, जितना होना चाहिए था।

हम बात कर रहे हैं प्रीतम शर्मा जी की—एक ऐसे खिलाड़ी, कप्तान और मार्गदर्शक की, जिन्होंने अपने समय में NCC मशरहां को सिर्फ मैदान पर लीड नहीं किया, बल्कि एक बिखर चुकी टीम को फिर से खड़ा करने में भी अहम भूमिका निभाई।

प्रीतम शर्मा जी की प्राथमिक शिक्षा गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल मशरहां से हुई। छठी कक्षा में कुछ समय थरौच में पढ़ाई करने के बाद उन्होंने गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल लालपानी, शिमला से छठी से बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा और उन्होंने आठवीं तथा दसवीं कक्षा में स्कूल टॉप किया।

इसके बाद गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज संजौली से B.Sc. की और यहीं से उनके क्रिकेटिंग सफर को नई दिशा मिली। 1997-98 में पहली बार इंटर-कॉलेज क्रिकेट प्रतियोगिता रामपुर बुशहर में खेला। इसके बाद M.Sc. Zoology, M.Sc. Chemistry, Chemistry में M.Phil. और B.Ed. जैसी उच्च शिक्षा हासिल की।

वर्ष 2004 में हिमालयन पब्लिक स्कूल में शिक्षक के रूप में करियर शुरू किया और 2008 में उसी संस्थान के प्रिंसिपल बने, जहाँ 2018 तक सेवाएँ दीं। इसके बाद सरकारी सेवा में आए और वर्तमान में TGT के पद पर कार्यरत हैं।

लेकिन क्रिकेट की कहानी यहीं नहीं रुकती।
1997-98 से शुरू हुआ उनका क्रिकेटिंग सफर 2004-05 से 2008-09 के दौर में अपने चरम पर पहुँचा, जब उन्होंने बड़े स्तर पर क्रिकेट खेला और कप्तान के रूप में NCC मशरहां को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी कप्तानी और मैदान पर फैसले लेने की क्षमता के कारण उस दौर में उन्हें मज़ाकिया अंदाज़ में “रिकी पोंटिंग” के नाम से भी जाना जाता था।

एक समय ऐसा भी आया जब NCC मशरहां की टीम काफी बिखर चुकी थी। जिस टीम का कभी 80-90 के दशक और 90 के दशक के बाद तक अपने क्षेत्र में बोलबाला रहा था, उसे दोबारा मजबूत करने की जरूरत थी।

यहीं से शुरू हुई प्रीतम शर्मा जी की कप्तानी में NCC मशरहां की वापसी।

जिस तरह भारतीय क्रिकेट में एक दौर में सौरव गांगुली की कप्तानी में नई प्रतिभाओं को मौका देकर टीम को फिर से मजबूत किया गया, उसी तरह प्रीतम शर्मा जी ने भी NCC मशरहां के युवा खिलाड़ियों को पहचानने, उन्हें टीम में जगह देने और आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया।

कई छोटे और नए खिलाड़ियों के पास खेलने की एंट्री तक नहीं होती थी, तो प्रीतम जी खुद उन्हें मौका देते थे। जरूरत पड़ने पर खर्चा-पर्चा तक उठाया, नए खिलाड़ियों को टीम से जोड़ा और एक मजबूत युवा टीम तैयार करने में योगदान दिया।

नतीजा यह रहा कि NCC मशरहां ने फिर से मैदान पर अपनी पहचान बनाई।
2008-09 से लेकर 2017-18 तक Nerwa, Sawra और कई अन्य बड़े टूर्नामेंटों में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और ट्रॉफियाँ जीतीं।

आज NCC मशरहां के इतिहास में जब उन खिलाड़ियों और कप्तानों का जिक्र होता है जिन्होंने टीम को आगे बढ़ाया, तो प्रीतम शर्मा जी का योगदान जरूर याद किया जाना चाहिए। क्योंकि उन्होंने सिर्फ मैच नहीं जीते, बल्कि नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार किया और टीम की नींव को मजबूत किया।

और सबसे खूबसूरत बात—क्रिकेट से उनका रिश्ता आज भी कायम है।
आज भी वे Veteran Cricket खेल रहे हैं और हाल ही में एक सीरीज़ में जीत का हिस्सा भी रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक मैदान बुलाता रहेगा, क्रिकेट का यह सफर जारी रहेगा।

🏏 NCC मशरहां के इतिहास में कुछ नाम ट्रॉफियों से याद किए जाते हैं, और कुछ नाम उस दौर को वापस लाने के लिए। प्रीतम शर्मा जी उन्हीं नामों में से एक हैं।

सलाम है उस कप्तान को, जिसने टीम को सिर्फ संभाला नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को साथ लेकर उसे फिर से खड़ा किया। 🙏

संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी — श्री संतराम भंडारी जीआज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी शख्सियत की, जिनकी जिंदगी की श...
12/09/2026

संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी — श्री संतराम भंडारी जी

आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी शख्सियत की, जिनकी जिंदगी की शुरुआत ही संघर्षों से हुई, लेकिन अपनी मेहनत, लगन और हिम्मत के दम पर उन्होंने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि समाज, महेश्वर देवता और युवाओं के लिए भी अपना जीवन समर्पित किया।

हम बात कर रहे हैं श्री संतराम भंडारी जी की।

महज 5 वर्ष की उम्र में पिता का साया सिर से उठ गया। इतनी छोटी उम्र में परिवार की जिम्मेदारियों का सामना करना किसी भी इंसान के लिए आसान नहीं होता। इसके बावजूद उन्होंने संघर्ष करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी और बड़ी मुश्किलों के बीच दसवीं कक्षा पास की।

दसवीं के बाद करीब दो वर्षों तक रोजगार की तलाश जारी रही, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी दौरान भगवान की कृपा से उनके घर पर तत्कालीन माल ऑफिसर श्री शेर सिंह जी का आगमन हुआ। उन्होंने संतराम जी की प्रतिभा और काबिलियत को पहचाना, उन्हें सही मार्गदर्शन दिया और आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया।

इसी मार्गदर्शन के बाद वर्ष 1977 में संतराम भंडारी जी ने पटवारी के रूप में अपने सरकारी सेवाकाल की शुरुआत की और किन्नौर में नियुक्त हुए।

लेकिन नौकरी मिल जाना उनके संघर्ष का अंत नहीं था। उस दौर का किन्नौर, आज की तरह सुविधाओं से संपन्न नहीं था। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने पूरी मेहनत और ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। अलग-अलग स्थानों पर सेवाएं देते हुए वे आगे बढ़ते रहे और अंततः सितंबर 2015 को शिलाई से कानूनगो के पद से सेवानिवृत्त हुए।

सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका सेवा भाव रुका नहीं।

महेश्वर देवता की सेवा उनके परिवार की पुरानी परंपरा रही है। उनके दादा जी ने उन्हें पहले ही भंडारी के रूप में नियुक्त कर दिया था, लेकिन निजी परिस्थितियों के कारण उन्होंने उस समय अपने चाचा जी को कार्यवाहक भंडारी के रूप में जिम्मेदारी दी। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पुनः महेश्वर देवता कमेटी में भंडारी के रूप में सेवा शुरू की।

आज वे महेश्वर देवता कमेटी में वित्तीय जिम्मेदारियों को संभालते हुए पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

लेकिन जिंदगी ने संतराम भंडारी जी को एक ऐसा दर्द दिया, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं।
2022 में उनकी जीवनसंगिनी Krishna Bhandari का अचानक निधन हो गया, और खुशियों के बीच एक बार फिर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
जिस साथी के साथ जिंदगी का हर सुख-दुख बांटा हो, उसका यूँ अचानक चले जाना बेहद गहरा आघात होता है।
बच्चों से माँ का साया और परिवार से एक अपना इंसान छिन जाना, इस दर्द को और भी गहरा कर गया।
फिर भी संतराम जी ने खुद को संभाला और टूटे हुए परिवार को सहारा देते हुए हिम्मत के साथ जिंदगी की राह पर आगे बढ़ते रहे।

NCC Mashrain के जाबल मैदान और वहां के खेलों से भी उनका पुराना रिश्ता रहा है। शुरुआती दौर में जब संसाधन बहुत कम थे, तब यहां कपड़े की गेंद से क्रिकेट खेला जाता था। बाद में लेदर बॉल क्रिकेट की शुरुआत हुई और संतराम जी उन शुरुआती खिलाड़ियों में रहे जिन्होंने यहां क्रिकेट की नींव मजबूत करने में योगदान दिया। वे उस समय टीम के प्रमुख गेंदबाजों में भी रहे।

आज भी उनका खेल और युवाओं के प्रति वही जुनून कायम है।

मैदान हो, खेल हो या गांव के युवाओं की बात—संतराम भंडारी जी हमेशा युवाओं को आगे बढ़ने और खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

हाल ही में Mashrain में आयोजित हुआ बड़ा क्रिकेट टूर्नामेंट भी उनके महत्वपूर्ण सहयोग से संभव हो पाया। करीब 10–15 वर्षों से जिस टूर्नामेंट का आयोजन नहीं हो पा रहा था, उसे दोबारा शुरू कराने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और चीफ पैट्रन के रूप में युवाओं का साथ दिया।

उनका आज भी यही संकल्प है—

“जो कुछ भी हमसे हो सकेगा, हम अपने युवाओं और अपने Mashrain के लिए हमेशा करते रहेंगे।”

ऐसी शख्सियतों की कहानी सामने आना इसलिए जरूरी है, क्योंकि ये केवल अपनी जिंदगी में सफल नहीं हुए, बल्कि इन्होंने अपने पीछे आने वाली पीढ़ी के लिए रास्ते भी बनाए हैं।

5 साल की उम्र में पिता को खोने वाले एक बच्चे से लेकर सरकारी सेवा, कानूनगो पद से सेवानिवृत्ति, महेश्वर देवता की सेवा और आज भी युवाओं व खेलों के लिए खड़े रहने तक—श्री संतराम भंडारी जी का जीवन अपने आप में संघर्ष, सेवा और समर्पण की एक प्रेरणादायक मिसाल है।

ऐसे लोगों को पहचान और सम्मान मिलना चाहिए, क्योंकि किसी क्षेत्र की असली पहचान सिर्फ उसकी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उन लोगों से होती है जिन्होंने उन उपलब्धियों की नींव रखी होती है।

🙏 श्री संतराम भंडारी जी को सादर नमन एवं हार्दिक सम्मान।
🏏 खेल • युवा • सेवा • संस्कार
NCC Mashrain ❤️

06/09/2026

🏆 गर्व का क्षण! 🏆

शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए श्री लोकिंदर नेगी जी, जो वर्तमान में पीएम श्री प्राईमरी विद्यालय पोर्टमोर में मुख्याध्यापक के रूप में सेवाएँ दे रहे हैं, को राज्य स्तरीय शिक्षा पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। 💐👏

यह सम्मान उनकी मेहनत, समर्पण और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। समाज और विद्यार्थियों के लिए उनका योगदान निश्चित रूप से प्रेरणादायक है।

🌸 बहुत-बहुत बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ! 🌸

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