13/12/2017
मन को वश में करने के ऊपर बहुत सुन्दर कहानी है ! एक व्यक्त्ति के पास बहुत ही हिष्ट-पुष्ट घोड़ा था ! लेकिन कोई उस घोड़े को वश नहीं कर पाता था ! कई राज्यों से गुज़रते हुए वह जब एक राज्य में आया तो राजा को खबर मिली कि एक बहुत ही हिष्ट-पुष्ट घोड़ा है लेकिन वश में नहीं होता ! जो उसको वश में करेगा उसको वो घोड़ा फ्री में मिल जाऐगा ! राजा ने ऐसे ही एक भरे मैदान के अन्दर अपने उस्तादों को बुलाया और कहा कि जो घोड़े को वश में करेगा उसको राजा की तरफ से भी इनाम मिलेगा ! कई उस्ताद आये उसको वश में करने के लिए , लेकिन जैसे ही नज़दीक जाते थे वो उछालकर के फेंक देता था या सामने से आक्रमण कर देता था ! घोड़ा वश में नहीं हो रहा था ! सारे उस्ताद जब फेल हो गये घोड़े को वश करने में तो राजा उदास हो गया कि हमारे राज्य में ऐसा कोई नहीं है , जो घोड़े को वश में कर सके ! राजकुमार काफी देर से बैठकर देख रहा था यह सारा दृश्य ! उसने राजा से कहा अगर मुझे अनुमति दें तो मैं इस घोड़े को वश में करना चाहता हूँ ! मुझे अपने में विशवास है ! राजा की अनुमति मिलते ही , राजकुमार ने देखा कि घोड़े को ऐसी दिशा में खड़ा किया गया था , जहाँ से उसकी परछाई लम्बी दिखती थी ! जैसे कोई व्यक्त्ति आगे से या पीछे आता था घोड़े को वश में करने के लिए , तो उसकी परछाई को देखकर घोड़ा भड़क उठता था ! इसलिए पीछे से अगर कोई जाता था तो पीछे लात मार देता था और आगे से कोई जाता था तो उस पर टूट पड़ता था ! सर्वप्रथम राजकुमार ने क्या किया ? धीरे-धीरे घोड़े की दिशा को बदली किया ! इस तरह से बदली किया कि घोड़े की परछाई भी पीछे गिरे ! जो आये उसकी परछाई भी पीछे गिरे ! फिर पीछे से जाकर इस घोड़े को वश में कर लिया ! सबसे पहले उसकी लगाम अपने हाथ में ली और घोड़ा वश में हो गया !
इसलिए भगवान ने अर्जुन को यही विधि बतलाया ! तुम आत्मा इतनी श्रेष्ठ और शक्त्तिशाली हो , इतनी बलवान हो , कि मन रूपी घोड़े को वश में करने के लिए सबसे पहले उसकी दिशा बदलना ज़रूरी है ! आज जिस दिशा में हम अपने मन को खड़ा कर रखें हैं ! उससे मन कभी वश में नहीं होगा ! वो कौन- सी दिशा में है कि जहाँ परछाई गिरती है , आशायें , तृष्णायें , इच्छायें ये सारी परछाई हैं ! जिसको प्राप्त करने में मन लगा हुआ है ! जितनी इच्छायें , तृष्णायें उसके सामने हैं उतना वो भड़कता रहता है , उछलता रहता है , कूदता रहता है , भ्रमण करता रहता है इसलिए सबसे पहले इस घोड़े की दिशा को बदलना आवश्यक है ! आध्यात्मिकता हमें यही समझ देती है कि किस प्रकार हम अपने मन की दिशा को परिवर्तन करें ! एक सकारात्मक दिशा की ओर उसका खड़ा करें ! उसके बाद इन्द्रियों को अनुशासित करें ! फिर उसके ऊपर सवार हो जायें बुद्धि की लगाम हाथ में खींच लो तो मन रूपी घोड़ा वश में हो जायेगा !