14/04/2024
सिटी ऑफ जॉय में मशहूर लेखक डोमनिक लापियर ने लिखा , एक गरीब किसान अक्सर एक कर्ज को उतारने के लिए दूसरा कर्ज लेता और दूसरे को उतारने तीसरा और अंत में अपनी जमीन गवां देता । और फिर वह किसान कभी अकेला तो कभी परिवार समेत रुख करता कलकत्ता जैसे महानगरों का जहां वह अमूमन रिक्शा खींचने या मजदूरी जैसे काम करने को ,अमानवीय परस्थितियों में रहने को मजबूर हो जाते अपनी आखिरी सांस तक ।
परन्तु आज कम से कम बिहार में परस्थियाँ बदल चुकी हैं , उपज के माध्यम से किसानों को उत्तम कृषि इनपुट, उत्तम खाद ,अव्वल दर्जे के बीज इत्यादि गांव में ही उपलब्ध करवा दिया जाते हैं ,नाम मात्र की सब्सक्रिप्शन फीस लेकर ।
अब वह साहूकारों के चंगुल से आजाद है ।
इसकी एक मिसाल है तस्वीर में दिखाई पड़ते यह खुशहाल किसान जो हमारे फील्ड ऑफिसर रंजीत कुमार के साथ हैं ।
रंजीत कुमार ने हमारी सोशल मीडिया टीम से यह गर्व से साझा किया की यह सबसे सफल किसानों में से एक हैं । गांव मोरसंदी में लगभग 2 एकड़ खेत में मक्का ,गेहूं ,आलू आदि की सफल फसल ले वर्ष में दो से ढाई लाख रुपया तक की आमदनी कर लेते हैं । यह अपने किसान समूह में अच्छा योगदान भी प्रदान करते हैं ।
लगभग 171 उपज किसान समूहों से आज हजारों किसान लाभान्वित हो रहे हैं । जहां उनकी समुचित पहचान के लिए आधार आधारित डिजिटल हस्ताक्षर से पहचान उपरांत ही एनरोल किया जाता है । डिजिटल तकनीकों के माध्यम से किसानों को सही समय पर सही मात्रा में कृषि इनपुट्स का वितरण किया जाता है ,साथ ही सारी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाती है ।
आज ही जुड़ें उपज से और शामिल हो जाएं उस सफर में जहां अपनी कृषि से आप एक स्वाभिमान भरा जीवन व्यतीत कर सकें ।
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