‘भारत रत्न भीमसेन जोशी ’ के जन्म-भूमि गडग (कर्नाटक) से, कला के विकास हेतु रजिस्टर्ड संस्था कला विकास परिषद द्वारा ‘भीमसेन मियूजिक फ़ाउंडेशन’ को अस्तित्व में लाया गया है । देश भर में रहनेवाले ‘भारत रत्न’ पंडित भीमसेन जोशी के शिष्य;प्रशिष्य और पं. जी का प्रशंसकों को एक मंच पर लाकर उनके ऊर्जा का अधिक कुशलता और पर्याप्त रूप से उपयोग करके पंडित जी का और हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की सेवा में
समर्पित है ।
फ़ाउंडेशन चतुर्मुख योजना :
देश के किसी राज्य की राजधानी मे हर साल जनवरी मे ‘भीमसेन संगीत समारोह’ आयोजन करना।
देश के चयनित किए गए शहरों में भारत रत्न संगीत दिग्गजों के स्मरण में ' संगीत-भारती ' अखिल भारतीय शास्त्रीय संगीत सम्मेलन व्यवस्थापन,करना।
युवा प्रतिभा को मुख्य धारा मे लाने के लिए ‘युव प्रतिभोतस्व’ आयोजन करना प्रमुख कार्यक्रम है ।
पं.जोशी जी ने अपना गुरु पं. सवायी गंधर्व जी का जन्म भूमि कुंदगोळ (कर्नाटक) में और अपना कर्म भूमि पुणे में गुरु पं. सवाई गन्धर्व स्मरण संगीत समारोह आरंभ किया था। इसी तरह पं. जोशी जि का जन्म स्थान गदग में उनका शिष्य;प्रशिष्य और प्रशंसकों इखट्टा हो कर भीमसेन संगीत उत्स्व आयोजन करना है. (पांच साल से कर रही है )
इसके साथ ही शुद्ध शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ; सुरक्षा। शुद्ध शास्त्रीय संगीत के प्रबुद्ध श्रोताओं की संख्या में वृद्धि करने की योजना है । इन सभी कार्यों के सुचारू रूप से शुरूआत करने के लिए देश भर में रहनेवाले ‘भारत रत्न’ पंडित भीमसेन जोशी के शिष्य प्रशिष्य और पं. जी का प्रशंसकों को एक मंच पर लाकर उनके ऊर्जा का अधिक कुशलता और पर्याप्त रूप से उपयोग करके पंडित जी का सेवा करना है। पंडित जोशी जी का सेवा ही शुद्ध शयस्त्रीय संगीत का सेवा है. इस लिए पंडित जी के प्रशंसकों को एक मंच पर लाने का कार्य शुरू कर दिया है ।
इस लक्ष्य के तहत हमारी इस योजना का पहला कदम, “ मिले सुर मेरा तुम्हारा ” (भीमसेन जोशी के प्रशंसकों भेंट संगीत कार्यक्रम के साथ) कार्यक्रम, देश के हर राज्यों की राजधानी, सिटी शहर मे का शुभारंभ किया है. प्रशंसकों के साथ बात, सांस्कृतिक संगठनों से भेंट,वरिष्ठ कलाकारों के साथ साक्षात्कार, कला संरक्षकों के साथ चर्चा और संगीत कार्यक्रम को फँस मीट मे कार्यान्वित गया किया है । यह एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण घटना है ज्यादातर प्रशंसक आदर आपका स्वागत है ।
आओ, संगीत से नाता जोड़े आपस में अपने हाथ जोड़े । पंडित भीमसेन जोशी सेवा को प्रोत्साहित करें ।