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21/01/2026
*Santulan sensitized the masses of Fazilka (Punjab), towards a gender-inclusive perspective, in a recent event held in J...
21/01/2026

*Santulan sensitized the masses of Fazilka (Punjab), towards a gender-inclusive perspective, in a recent event held in Jan 2026.*

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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा ‘संतुलन’ प्रोजेक्ट के अंतर्गत फाजिल्का स्थित आश्रम में लोहड़ी पर्व श्रद्धा, उल्लास एव...
13/01/2026

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा ‘संतुलन’ प्रोजेक्ट के अंतर्गत फाजिल्का स्थित आश्रम में लोहड़ी पर्व श्रद्धा, उल्लास एवं सामाजिक चेतना के साथ मनाया गया। ‘संतुलन’ परियोजना के माध्यम से समाज में “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जन-जागरूकता फैलाई जाती है, ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर समाज में सम्मानजनक और ऊँचा स्थान प्राप्त कर सकें।
इस अवसर पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी हरपिंदर भारती जी ने उपस्थित संगत को संबोधित करते हुए कहा कि पंजाब त्योहारों की धरती है,जहाँ दिवाली, होली, बसंत और वैसाखी की भांति लोहड़ी का पर्व भी बड़े उत्साह और प्रेम के साथ मनाया जाता है। ये पर्व हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हैं।
साध्वी जी ने लोहड़ी के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस प्रकार लोहड़ी की अग्नि में तिल, मूंगफली आदि अर्पित कर बाहरी रूप से नकारात्मकता को त्यागने का भाव व्यक्त किया जाता है, उसी प्रकार पूर्ण गुरु हमारे भीतर ज्ञान की दिव्य अग्नि प्रज्वलित करते हैं, जिससे अज्ञान और पाप रूपी अंधकार नष्ट हो जाता है।
आगे इस अवसर पर साध्वी अमरा भारती जी ने उपस्थित संगत को संबोधित करते हुए कहा कि लोहड़ी और माघी जैसे पर्व केवल मौसमी या परंपरागत उत्सव नहीं हैं, बल्कि ये पर्व हमें आपसी प्रेम, एकता और भारतीय संस्कृति के मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि जब हम अपने पर्वों को आध्यात्मिक चेतना के साथ मनाते हैं, तभी उनका वास्तविक उद्देश्य पूर्ण होता है। साध्वी जी ने समाज में बेटियों के सम्मान, संस्कार और सशक्तिकरण पर भी बल दिया तथा सभी को संस्कारयुक्त जीवन जीने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर बच्चों द्वारा भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत रंगारंग प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिनमें भांगड़ा, नृत्य नाट्य के माध्यम से हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। बच्चों की इन मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित संगत का मन मोह लिया और वातावरण को उल्लासपूर्ण बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी नरेश सचदेवा ,पत्नी श्रीमती कमलेश सचदेवा, विशाल सचदेवा,शिखा सचदेवा की ओर से बेटियों को लोहड़ी के अवसर पर उपहार भेंट किए गए। इस पुनीत कार्य हेतु साध्वी जी द्वारा संस्थान की ओर से समाजसेवी परिवार का हृदय से आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम में साध्वी प्रीति भारती जी एवं साध्वी गुरप्रीत भारती जी द्वारा प्रस्तुत सुमधुर भजनों ने पूरे पंडाल को भक्ति-रस में सराबोर कर दिया। उनके भजन गायन पर संगत भाव-विभोर होकर झूम उठी और वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक आनंद से भर गया।
अंत में साध्वी अमरा भारती जी द्वारा समस्त संगत को लोहड़ी एवं माघी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दी गईं तथा सभी के लिए लंगर प्रसाद की व्यवस्था की गई।

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान फाजिल्का में लोहड़ी कार्यक्रम की कुछ विशेष झलकियां
13/01/2026

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान फाजिल्का में लोहड़ी कार्यक्रम की कुछ विशेष झलकियां

21/12/2025

दिव्य गुरु का
दिव्य दरबार

ਸਤਿਸੰਗ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਪੰਜੇ ਕੇ ਉਤਾੜ
23/11/2025

ਸਤਿਸੰਗ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਪੰਜੇ ਕੇ ਉਤਾੜ

ਦੋ ਦਿਨਾਂ ਅਧਿਆਤਮਿਕ ਵਿਚਾਰ ਪਿੰਡ ਮੋਹਨ ਕੇ ਹਿਠਾੜ੍ਹ
23/11/2025

ਦੋ ਦਿਨਾਂ ਅਧਿਆਤਮਿਕ ਵਿਚਾਰ ਪਿੰਡ ਮੋਹਨ ਕੇ ਹਿਠਾੜ੍ਹ

✨ *जय महाराज जी की।* ✨  की ओर से बीते  #रविवार को शाखा  " #फ़ाज़िल्का" में कार्यक्रम आयोजित किया गिया। कार्यक्रम का उद्द...
30/09/2025

✨ *जय महाराज जी की।* ✨

की ओर से बीते #रविवार को शाखा " #फ़ाज़िल्का" में कार्यक्रम आयोजित किया गिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को #गुरु घर की #सेवाओं के लिए #एकजुट करना और #ब्रह्मज्ञान के #प्रचार हेतु तत्पर करना था।

आप सभी के साथ कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें साझा की जा रही हैं।

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से स्थानीय आश्रम फाजिल्का मे हरियाली तीज के  उपलक्ष में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया ...
29/08/2025

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से स्थानीय आश्रम फाजिल्का मे हरियाली तीज के उपलक्ष में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी ब्रह्ननिष्ठा भारती जी ने बताया है कि तीज का यह पावन पर्व नारी जाति को समर्पित है । नारी जो सदा से ही समाज की धुरी रही है । नारी के उत्थान में ही समाज का उत्थान निहित है। और इस बात को हमारे ऋषि व वरिष्ठ जन बड़े अच्छे से जानते थे।इसलिए पुरातन समय में नारी का समाज में बड़ा उत्कृष्ट स्थान था। पुरातन काल की नारी अत्यंत विदूषी एवं सच्चरित्रवती थी । जो स्वयं के घर परिवार के साथ समाज को भी सही दिशा प्रदान कर समाज की दशा के सुधार कार्य में भी अपना पूर्ण सहयोग प्रदान किया करती थी। भारतीय नारी भारत का गौरव हुआ करती थी। किन्तु कालान्तर में समाज नारी को हेय दृष्टि से देखने लगा।नारी को बोझ मानने लगा। उसे केवल भोग की वस्तु मात्र समझने लगा। यही कारण है कि समाज में नारी की प्रतिष्ठा पर भी आँच आने लगी। जब आक्रांता भारत में आए तो उन्होंने नारी पर असंख्य अत्याचार किए । जिसके परिणाम स्वरूप समाज में अनेकों विकृतियाँ आईं। अनेकों प्रकार से नारी को प्रताड़ित किया जाने लगा। और उसकी इस दयनीय स्थिति को सुधारने के लिए अनेकों समाज सुधार कार्य प्रारंभ किए गए। परन्तु परम पूजनीय गुरुदेव सर्वश्री आशुतोष महाराज जी कहते हैं कि जब तक नारी स्वयं के उद्धार के लिए स्वयं कृतसंकल्प नहीं होगी तब तक अन्य कोई भी उसका उद्धार नहीं कर सकता । स्वयं की प्रतिष्ठा उसे स्वयं ही प्रतिष्ठित करनी होगी। नारी शक्ति स्वरूपा है। उसे अपने शक्ति स्वरूप से अवगत होना होगा। वह अनंत शक्तियों की स्वामिनी है। किन्तु आज वह अपने इस शक्ति स्वरूप से अनभिज्ञ है । जब एक तत्वेता संत जीवन में आकर उसे ब्रह्मज्ञान की दीक्षा प्रदान कर , उसके अंतःकरण में ईश्वर के प्रकाश रूप को प्रकट कर देंगे तो उस ब्रह्मज्ञान की साधना से ही वह पुनः अपने शक्ति स्वरूप को जान पाएगी। पाश्चात्य जगत के प्रभाव में आकर आज की नारी की जो प्रतिष्ठा धूमिल हो रही है उसे पुनः प्राप्त करने का एक मात्र साधन ब्रह्मज्ञान की साधना ही है। इस शुभ अवसर पर विशेष रूप में श्रीमती खुशबू सवना(समाज सेविका),(श्रीमती किरणजीत कौर अरोड़ा,(प्रेजिडेंट कंज्यूमर कोर्ट फिरोजपुर ),श्रीमती मधु शर्मा (प्रिंसिपल, सर्व हितकारी विद्या मंदिर, फाजिल्का),श्रीमती कविता सपरा (जीनियस कॉन्वेंट स्कूल, फाजिल्का प्रिंसिपल),श्रीमती सोनिया सेतिया (प्रिंसिपल, हरि नारायण बाल विद्या मंदिर, फाजिल्का),श्रीमती मणि (डीसीडीएवी स्कूल, फाजिल्का प्रिंसिपल) ने माँ दुर्गा के आगे ज्योति प्रोजलित की। ओर उनके साथ रितु कटारिया (लायंस क्लब विशाल),ममता गगनेजा (अध्यापिका लायंस क्लब विशाल),सानिया छाबड़ा (सदस्य लायंस क्लब), सुनीता सचदेवा (सदस्य लायंस क्लब पूजा वाट्स(सदस्य लायंस क्लब,)नीरू चावला (स्काईविन इंस्टिट्यूट),अनु गोयल (महिला कल्याण समिति),श्रीमती सविता धूड़िया ,(पूर्व एमसी ),जीनत सेठी एडवोकेट,(संयुक्त सचिव बार एसोसिएशन फाजिल्का), एडवोकेट ममता भी उपस्थित हुए। सभी ने दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा इस नेक नारी शशक्तिकरण सामाजिक कार्य की सराहना की और अपने भरपुर सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने निवेदन भी किया के ऐसे प्रोग्राम हमारे स्कूल कॉलेज में भी किए जाएं ता की ऐसे विचारों से हमारे विद्यार्थियों को भी सही मार्गदर्शन मिल सके। प्रोग्राम के उपरांत भोजन प्रसाद का भी प्रबंध किया गया। इस मौके पर बहुत सुन्दर सजावट भी की गई।

इंसान की सोच ही समय को अनुकूल या प्रतिकूल बनाती है।फाजिल्का : दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की और से कृष्ण जन्माष्टमी के उ...
18/08/2025

इंसान की सोच ही समय को अनुकूल या प्रतिकूल बनाती है।

फाजिल्का :

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की और से कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष में फाजिल्का आश्रम मे कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें संस्थान के संस्थापक व संचालक सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी सुश्री रुपिंदर भारती जी ने भगवान श्री कृष्ण जी के जीवन की अनेका अनेक लीलाओं पर प्रकाश डाला। उन्होनें अपने विचारों के माध्यम से बताया कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म अर्धरात्रि में भाद्रपद कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। उनका संपूर्ण जीवन संघर्ष की एक खुली किताब है।उनके जन्म का समय रात्रि 12:00 बजे हैं। जिसे सभी अपवित्र मानते हैं लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने घोर रात्रि को अपने जन्म का लग्न चुनकर यह दिखा दिया कि इंसान की सोच ही समय को अनुकूल या प्रतिकूल बनाती है। हम समय के गुलाम नहीं बल्कि समय हमारा गुलाम है। भगवान श्री कृष्ण का जन्म स्थल है कारागार। जिसे सभी अशोभनीय स्थान मानते हैं।प्रभु ने यहां जन्म लेकर यह सिद्ध कर दिया की जन्म स्थल के कारण कोई महान नहीं होता, व्यक्ति महान होता है अपने कर्मों से। प्रभु श्री कृष्ण वासुदेव जी के संग बांस की टोकरी में गोकुल की ओर बढ़ते हैं।बांस रसविहीन और खोखला होता है।लेकिन उनके भाग्य में बस यही आया। उन्होंने इस फांके बांस की बांसुरी बना डाली। इस लीला के माध्यम से उन्होनें बताया कि आप के पास कैसे साधन है ये बात मायने नहीं रखती अपितु आप उन साधनों का प्रयोग किस प्रकार करते हैं ये बात मायने रखती है। जिस समय प्रभु वासुदेव जी के संग यमुना पार कर रहे थे उस समय विशालकाय सर्प ने उन पर छाया की थी। सर्प जो काल का प्रतीक माना जाता है भगवान कृष्ण ने उसे ही अपना रक्षक बनाया।
साध्वी जी ने समझाते हुए कहा कि इस तरह सभी लीलाओं के द्वारा भगवान श्री कृष्ण ने यही आदर्श रखा की हर परिस्थिति में हमें हौसला और सकारात्मक सोच रखते हुए विजय प्राप्त करनी चाहिए।लेकिन यह तभी संभव है जब पूर्ण सद्गुरु के द्वारा हम ब्रह्म ज्ञान प्राप्त कर ईश्वर के दिव्य प्रकाश से जुड़ जाते हैं। हमारा अंत: करण अलौकिक होता है और हम भगवान श्री कृष्ण की तरह जीने की कला सीख पाते हैं। उन्होनें कहा कि श्री कृष्ण की लीलाएं बुद्धि व तर्क का विषय नही, दर्शन व भक्ति का विषय है। कृष्ण तत्व को जानने के लिए चर्म चक्षुओं की नही दिव्य चक्षु की आवश्यकता है। साध्वी जी ने कहा कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा किए जाने वाला समागम केवल मनोरंजन के लिए नहीं किए जाता अपितु श्री कृष्ण तत्व को उजागर भी किया जाता है। इस अवसर पर साध्वी बलजीत भारती जी, साध्वी अमरा भारती जी एवम नैन्सी जी ने श्री कृष्ण महिमा मे सुंदर भजनों का गायन किया। कार्यक्रम का समापन प्रभु की पावन आरती से किया गया।

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