26/11/2025
श्रद्धांजलि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शिखर पुरुष
उत्तराखंड क्रांति दल के संस्थापक
फील्ड मार्शल दिवाकर भट्ट जी को
उत्तराखंड ने आज अपना एक अमूल्य रत्न खो दिया।
कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के संस्थापक सदस्य और उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी नेता, दिवाकर भट्ट जी (79) अब हमारे बीच नहीं रहे। यह खबर हर उत्तराखंडी के हृदय को झकझोर देने वाली है।
दिवाकर भट्ट जी सिर्फ एक नाम नहीं थे
वह पहाड़ की आवाज, पहाड़ का साहस, पहाड़ का संघर्ष और पहाड़ की आत्मा थे।
उनकी यात्रा अद्भुत थी:
गढ़वाल विश्वविद्यालय आंदोलन से लेकर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की स्थापना तक, उन्होंने युवाओं में ऐसी चेतना जगाई कि एक आवाज पर हजारों युवा सड़कों पर उतर आते थे।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन में उनकी भूमिका इतनी प्रखर थी कि
स्व. इंद्रमणि बडोनी जी ने उन्हें “फील्ड मार्शल” की उपाधि दी।
वर्ष 1978 की दिल्ली रैली के लिए बदरीनाथ से दिल्ली तक पैदल यात्रा करने वाले चुनिंदा क्रांतिकारियों में भट्ट जी शामिल थे।
1979 में गठित उत्तराखंड क्रांति दल के वे संस्थापक सदस्यों में से एक रहे।
राज्य आंदोलन के दौरान उनकी आवाज प्रशासन के लिए इतनी मजबूत थी कि उन पर “शूट एट साइट” के आदेश जारी हुए थे।
उन्होंने पहाड़ और पहाड़वासियों के लिए सबकुछ दांव पर लगा दिया।
श्रीयंत्र टापू पर अलकनंदा किनारे भूख हड़ताल,
टिहरी गढ़वाल के दुर्गम खैट पर्वत पर 31 दिन भूख हड़ताल।
ये त्याग, ये तप, ये बलिदान शायद ही कोई दोहरा सके।
पर नियति ने उनके साथ बड़ा अन्याय किया
2002 में देवप्रयाग से चुनाव हारने के सदमे में
उनकी पत्नी ने ज़हर खाकर अपनी जान दे दी।
यह पीड़ा किसी भी इंसान को तोड़ सकती थी,
लेकिन दिवाकर भट्ट जी पहाड़ की तरह अडिग रहे।
और फिर 2007 में
उन्होंने इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड 50% वोटों से जीत हासिल की।
पर सच कड़वा है
जिस वीर ने अपना पूरा जीवन पहाड़ और पहाड़वासियों के लिए झोंक दिया,
वह अपने जीवनकाल में वह सम्मान कभी नहीं पा सका जिसके वह हकदार थे।
आज उनका जाना सिर्फ एक नेता का चले जाना नहीं
यह एक युग का अंत है
एक आंदोलनकारी की आखिरी सांस है
एक पहाड़ी आत्मा की विदाई है।
उत्तराखंड उनका सदैव ऋणी रहेगा।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे।
ओम् शांति।