29/03/2026
यह खबर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और बदलती वैश्विक कूटनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। लगभग 8 साल बाद ईरान से LPG की यह खरीद दिखाती है कि भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यावहारिक और साहसिक कदम उठा रहा है।
यहाँ इस पूरे घटनाक्रम के मुख्य बिंदु दिए गए हैं जो स्थिति को स्पष्ट करते हैं:
महत्वपूर्ण घटनाक्रम: एक नज़र में
* ऐतिहासिक खरीद: जून 2018 के बाद पहली बार इंडियन ऑयल (IOCL) ने ईरान से LPG मंगवाई है।
* शिपमेंट का विवरण: जहाज 'सी बर्ड' (Sea Bird) लगभग 43,000 टन ब्यूटेन और प्रोपेन लेकर मंगलौर बंदरगाह पहुँच रहा है।
* सहयोग: यह खेप केवल IOCL के लिए नहीं है, बल्कि इसे BPCL और HPCL के साथ साझा किया जाएगा।
* अमेरिकी छूट: यह खरीद अमेरिका द्वारा दी गई उस अस्थायी छूट के कारण संभव हुई है, जो भारत को ईरान से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने की अनुमति देती है।
होर्मुज स्ट्रेट और भारत की चुनौती
भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) का रास्ता जीवन रेखा की तरह है, क्योंकि:
* भारत अपनी 60-70% LPG आयात करता है।
* इस आयात का 90% हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आता है।
* युद्ध के कारण इस रास्ते पर ईरान का कड़ा नियंत्रण है, जिससे आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना हुआ था।
ईरान की 'फ्रेंडली देशों' वाली नीति
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह भारत जैसे मित्र देशों को सुरक्षित रास्ता देगा, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें भी जुड़ी हैं:
* जहाज ईरान के खिलाफ किसी सैन्य या कूटनीतिक कार्रवाई में शामिल नहीं होने चाहिए।
* भारत के अभी भी कई जहाज वहां फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने के लिए बातचीत जारी है।
* BPCL द्वारा अनुबंधित दो और जहाज, 'ग्रीन आशा' और 'ग्रीन सांवी', भी कतार में हैं।
> विशेष टिप्पणी: हालांकि 43,000 टन की यह मात्रा भारत की केवल आधे दिन की मांग को पूरा करती है, लेकिन इसका प्रतीकात्मक महत्व बहुत बड़ा है। यह दर्शाता है कि भारत संकट के समय अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और प्रतिबंधों के बीच भी अपने हितों की रक्षा करने में सक्षम है।
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