Madhya Pradesh Urdu Academy, Mahakmaaye Saqafat

Madhya Pradesh Urdu Academy, Mahakmaaye Saqafat Madhya pradesh Urdu Academy (Mahakma e Saqafat) is an organisation to promote urdu language and literature. It is situated at Bhopal

     مدھیہ پردیش اردو اکادمی، سنسکرتی پریشد، محکمہ ثقافت کے زیر اہتمام صوفی صوفیانہ میںجشن چراغاںرقص جنوں : رقص کی پیشکش...
25/10/2025





مدھیہ پردیش اردو اکادمی، سنسکرتی پریشد، محکمہ ثقافت کے زیر اہتمام صوفی صوفیانہ میں

جشن چراغاں
رقص جنوں : رقص کی پیشکش
نغمہ روح : موسیقانه پیشکش
خطاب
28 اکتوبر ، 2025 کو شام 6:30بجے
انجنی آڈیٹوریم ، رویندر بھون، پالی ٹیکنک چوراہا، بھوپال میں منعقد ہے۔

شام 6:30 بجے
خطاب
موضوع : اردو ادب میں چراغ روحانیت
مقرر: جناب ضیا علوی۔ لکھنؤ

نغمہ روح : موسیقانه پیشکش
معروف غزل گلوکار
جناب انور حسین اور ساتھی فنکار جبلپور

رقص جنوں : رقص کی پیشکش
عالمی شہرت یافتہ کتھک فنکاره
ڈاکٹر وی انورادھا سنگھ اور گروپ۔ بھوپال

نظامت : ثمینہ علی صدیقی

آپ سبھی بصد احترام مدعو ہیں۔

ڈاکٹر نصرت مہدی
ڈائریکٹر

نوٹ: طلبا ، ریسرچ اسکالر ، ٹیچر اور پروفیسر حضرات آنلائن آف لائن رجسٹریشن کر اسکتے ہیں پروگرام میں شرکت کرنے پر سر ٹیفکیٹ دیے جائیں گے۔

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मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी
मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग द्वारा सूफ़ी सूफ़ियाना में

जश्न-ए-चराग़ाॅं
रक़्से जुनूँ : नृत्य प्रस्तुति
नग़मा-ए-रूह : सांगीतिक प्रस्तुति
व्याख्यान
28 अक्टूबर, 2025 को सायं 6.30 बजे अंजनी सभागृह, रवीन्द्र भवन पॉलिटेक्निक चौराहा, भोपाल में आयोजित है।

सायं 6.30 बजे
व्याख्यान
विषय : उर्दू अदब में चराग़े रूहानियत
वक्ता : श्री ज़िया अल्वी, लखनऊ

नग़मा-ए-रूह :सांगीतिक प्रस्तुति
सुप्रसिद्ध ग़ज़ल गायक
श्री अनवर हुसैन एवं दल, जबलपुर

रक़्से जुनूँ : नृत्य प्रस्तुति
अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक नृत्यांगना
डॉ. वी. अनुराधा सिंह एवं दल, भोपाल

संचालन : समीना अली सिद्दीक़ी

आप सभी सादर साग्रह आमंत्रित हैं।

डॉ. नुसरत मेहदी
निदेशक मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी

विद्यार्थी, शोधार्थी, अध्यापक, प्राध्यापक आदि ऑनलाइन/ऑन दि स्पाट निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। उपस्थिति पश्चात प्रमाण-पत्र दिये जाएँगे।

     بیٹیاں کوکھ میں ماروگے تو یہ بھی ہوگاراجا تو ہوگا مگر ہوگی نہ رانی کوئی " مدھیہ پردیش اردو اکیڈمی کے زیر اہتمام جبل...
22/10/2025







بیٹیاں کوکھ میں ماروگے تو یہ بھی ہوگا
راجا تو ہوگا مگر ہوگی نہ رانی کوئی
" مدھیہ پردیش اردو اکیڈمی کے زیر اہتمام جبلپور میں "سلسلہ اور تلاش جوہر" کے تحت ادبی و شعری نشست منعقد"

مدھیہ پردیش اردو اکیڈمی، سنسکرتی پریشد، محکمۂ ثقافت کے زیر اہتمام ضلع ادب گوشہ، جبلپور کے ذریعے ’’سلسلہ اور تلاش جوہر‘‘کے تحت ادبی و شعری نشست کا انعقاد 19 اکتوبر ، 2025 کو شری جانکی رمن کالج، جبلپور میں ضلع کوآرڈینیٹر راشد راہی کے تعاون سے کیا گیا۔

جبلپور میں منعقدہ "سلسلہ اور تلاشِ جوہر" کے لیے مدھیہ پردیش اردو اکیڈمی کی ڈائریکٹر ڈاکٹر نصرت مہدی نے اپنے پیغام میں کہا کہ اردو اکادمی کا مقصد صرف پروگرام منعقد کرنا نہیں، بلکہ ادب کے تسلسل کو برقرار رکھنا ہے۔ ‘سلسلہ’ کے ذریعے ہم سینئر ادیبوں کی وراثت اور خدمات کو خراجِ تحسین پیش کر رہے ہیں، تاکہ آنے والی نسلیں ان سے رہنمائی حاصل کر سکیں۔ وہیں ‘تلاشِ جوہر’ کے ذریعے نئی صلاحیتوں کو تلاش کرکے انہیں اپنی تخلیقی شناخت بنانے کا موقع فراہم کیا جا رہا ہے۔ یہی ہماری ثقافتی روایت کی اصل خوبصورتی ہے، تجربے اور جدت کا سنگم۔
جبلپور ضلع کے کوآرڈینیٹر راشد راہی نے بتایا کہ ادبی و شعری نشست دو اجلاس پر مبنی تھی ۔ پہلے اجلاس میں دوپہر 1:00بجے تلاش جوہر منعقد ہوا جس میں ضلع کے نئےتخلیق کاروں نے فی البدیہہ مقابلے میں حصہ لیا۔ حکم صاحبان کے طور پر جبلپور کے استاد شاعر بابو انور نظامی اور دموہ کے سینیئر شاعر طاہر دموہی موجود تھے جنہوں نے نئے تخلیق کاروں کو شعر کہنے کے لیے دو طرحی مصرعے دیے۔ دیے گئے مصرعوں پر نئےتخلیق کاوں کے ذریعے کہی گئی غزلوں اور ان کی پیشکش کی بنیاد پر پرویز عالم پرواز نے پہلا، فضل رحمن نے دوسرا، اور شاہنواز محور نے تیسرا مقام حاصل کیا۔پہلا، دوسرا، اور تیسرا مقام حاصل کرنے والے تینوں فاتحین کو اردو اکیڈمی کی طرف سے بالترتیب 3000/-، 2000/-، اور 1000/- روپے کی انعامی رقم اور سرٹیفکیٹ دیے جائیں گے۔
دوسرے اجلاس میں دوپہر 3:00 بجے سلسلہ کے تحت ادبی و شعری نشست کا انعقاد ہوا جس کی صدارت استاد شاعر بابو انور نظامی نے کی۔ اس موقع پر مہمان خصوصی کے طور پر ڈاکٹر ابھیجات کرشن ترپاٹھی اور مہمان ذی وقار کے طور پر طاہر دموہی اسٹیج پر جلوہ افروز رہے ۔
شعری نشست میں جن شعراء نے اپنا کلام پیش کیا ان کے نام اور اشعار درج ذیل ہیں :

رہبری مقدر ہے ٹھوکروں سے کیا لینا
آدمی ہی چلتے ہیں،
حوصلہ ضروری ہے پتھروں کے سینے سے راستے نکلتے ہیں
بابو انور نظامی

بیٹیاں کوکھ میں ماروگے تو یہ بھی ہوگا
راجا تو ہوگا مگر ہوگی نہ رانی کوئی
طاہر دموہی

تو تو اپنی جس ادا میں جب ملا اچھا لگا
آج تو بھی کہہ دے تجھ کو مجھ میں کیا اچھا لگا
فاروق اشرف

پھر یہاں پر عشق میں اک حادثہ ہونے کو ہے
ایک پاگل ہو چکا ہے، دوسرا ہونے کو ہے
راشد راہی

دلوں سے بڑھ کے دنیا میں کوئی رستہ نہیں ہوتا
جہاں دل دل سے ملتے ہیں وہاں پردہ نہیں ہوتا
جاوید ناز

ارمان سارے موم کی مانند گل گئے
جب سے تیری نگاہ کے تیور بدل گئے
عتیق جاویدی

اب تو دشوار ہوا آپ سے ملنا میرا
پر دعاؤں کے لیے ہاتھ اٹھا رکھے ہیں
پرتھبا پٹیل

کہیں پر گل بنا دینا، کہیں تتلی بنا دینا
بنانے کا ہنر ہے گر تو کچھ خوبی بنا دینا
ہمیشہ جنگ سے آگے ہی رکھنا امن کی باتیں
سدرشن چکر سے پہلے سدا مرلی بنا دینا
شیوم سونی

بند زباں ہے دل میں پھر بھی بستی صورت تیری ہے
انترمن سے آہ نکلتی آج ضرورت تیری ہے
اجے مشرا اجے

کام مشکل یہ کر گیا ہوں میں
اس کے دل میں اتر گیا ہوں میں
ارمان جبلپوری

پروگرام کی نظامت کے فرائض ونود نین اور راشد راہی نے بحسن خوبی انجام دیے۔پروگرام کے آخر میں ضلع کوآرڈینیٹر راشد راہی نے تمام مہمانوں، تخلیق کاروں اور سامعین کا شکریہ ادا کیا۔

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बेटियाँ कोख में मारोगे तो ये भी होगा
राजा तो होगा मगर होगी न रानी कोई

"मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा जबलपुर में "सिलसिला एवं तलाशे जौहर" के तहत व्याख्यान एवं रचना पाठ आयोजित"

मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग के तत्त्वावधान में ज़िला अदब गोशा, जबलपूर के द्वारा सिलसिला एवं तलाशे जौहर के तहत व्याख्यान एवं रचना पाठ का आयोजन 19 अक्टूबर 2025 को श्री जानकी रमण महाविद्यालय, जबलपूर में ज़िला समन्वयक राशिद के सहयोग से किया गया।

जबलपुर में आयोजित सिलसिला एवं तलाशे जौहर के लिए मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ नुसरत मेहदी ने अपने संदेश में कहा कि उर्दू अकादमी का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि साहित्य की निरंतरता को सहेजना है। ‘सिलसिला’ के माध्यम से हम वरिष्ठ साहित्यकारों की विरासत और योगदान को सम्मानित कर रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ उनसे प्रेरणा ले सकें। वहीं ‘तलाशे जौहर’ के ज़रिए नई प्रतिभाओं को खोजने और उन्हें अपनी रचनात्मक पहचान बनाने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। यही हमारी सांस्कृतिक परंपरा की असली ख़ूबसूरती है, अनुभव और नवाचार का संगम।साथ ही उन्होंने तलाशे जौहर के विजेताओं एवं वरिष्ठ रचनाकारों को मुबारकबाद भी पेश की।
जबलपुर ज़िले के समन्वयक राशिद राही ने बताया कि कार्यक्रम दो सत्रों पर आधारित था। प्रथम सत्र में दोपहर 1:00 बजे तलाशे जौहर प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें ज़िले के नये रचनाकारों ने तात्कालिक लेखन प्रतियोगिता में भाग लिया। निर्णायक के रूप में जबलपुर के उस्ताद शायर बाबू अनवर निज़ामी एवं दमोह के वरिष्ठ शायर ताहिर दमोही मौजूद रहे जिन्होंने प्रतिभागियों शेर कहने के लिए दो तरही मिसरे दिये। दिये गये मिसरों पर नए रचनाकारों द्वारा कही गई ग़ज़लों एवं उनकी प्रस्तुति के आधार पर परवेज़ आलम परवाज़ ने प्रथम, फ़ज़ल रहमान ने द्वित्तीय एवं शाहनवाज़ महवर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले तीनों विजेता रचनाकारों को उर्दू अकादमी द्वारा पुरस्कार राशि क्रमशः 3000/-, 2000/- और 1000/- एवं प्रमाण पत्र दिए जाएंगे।

दूसरे सत्र में दोपहर 3:00 बजे सिलसिला के तहत व्याख्यान एवं रचना पाठ का आयोजन हुआ जिसकी अध्यक्षता बाबू अनवर निज़ामी ने की। वहीं मुख्य अतिथि के रूप में डॉ अभिजात कृष्ण त्रिपाठी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में ताहिर दमोही मंच उपस्थित रहे। रचना पाठ में जिन शायरों ने अपना कलाम पेश किया उनके नाम और अशआर निम्न हैं :

बाबू अनवर निज़ामी
रहबरी मुक़द्दर है ठोकरों से क्या लेना आदमी ही चलते हैं
हौसला ज़रूरी है पत्थरों के सीने से रास्ते निकलते हैं

ताहिर दमोही
बेटियाँ कोख में मारोगे तो ये भी होगा
राजा तो होगा मगर होगी न रानी कोई

फ़ारूक़ अशरफ़
तू तो अपनी जिस अदा में जब मिला अच्छा लगा
आज तू भी कह दे तुझको मुझ में क्या अच्छा लगा

अतीक़ जावेदी
अरमान सारे मोम के मानिंद गल गए
जब से तेरी निगाह के तेवर बदल गए

राशिद राही
फिर यहां पर इश्क़ में इक हादसा होने को है
एक पागल हो चुका है दूसरा होने को है

जावेद नाज़
दिलों से बढ़के दुनिया में कोई रिश्ता नहीं होता
जहाँ दिल से दिल मिलते हैं वहाँ पर्दा नहीं होता

प्रतिभा पटेल
अब तो दुश्वार हुआ आपसे मिलना मेरा
पर दुआओं के लिए हाथ उठा रक्खे हैं

शिवम सोनी
कहीं पर गुल बना देना कहीं तितली बना देना
बनाने का हुनर है गर तो कुछ खूबी बना देना
हमेशा जंग से आगे ही रखना अम्न की बातें
सुदर्शन चक्र से पहले सदा मुरली बना देना

अजय मिश्रा अजय
बंद ज़ुबां है दिल में फिर भी बसती सूरत तेरी है
अंतर्मन से आह निकलती आज ज़रूरत तेरी है

अरमान जबलपुरी
काम मुश्किल ये कर गया हूं मैं
उस के दिल में उतर गया हूं मैं

कार्यक्रम का संचालन विनोद नयन एवं राशिद राही द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के अंत में ज़िला समन्वयक राशिद राही ने सभी अतिथियों, रचनाकारों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

     مدھیہ پردیش اردو اکادمی، سنسکرتی پریشد ، محکمہ ثقافت کے زیر اہتمامضلع ادب گوشہ ، جبلپور کے ذریعےسلسلہ اور تلاش جوہر...
16/10/2025







مدھیہ پردیش اردو اکادمی، سنسکرتی پریشد ، محکمہ ثقافت کے زیر اہتمام
ضلع ادب گوشہ ، جبلپور کے ذریعے
سلسلہ اور تلاش جوہر
کے تحت
ادبی و شعری نشست
بتاریخ 19 اکتوبر 2025، بروز اتوار
شری جانکی رمن کالج، آغا چوک، جبلپور
تلاش جوہر : دوپہر 12:00 بجے
سلسلہ : دوپہر 3:00 بجے

مہمان خصوصی
ڈاکٹر ا بھیجات کرشن ترپاٹھی

خصوصی مدعو مقرر اور شعرا حضرات
طاہر دموہی (دموه)
بابو انور نظامی (جبلپور)

مقامی شعراء حضرات
سورج رائے سورج، ہیمراج راز ساگری، فاروق اشرف، ونود نین، خورشید عالم، پرتیبھا پٹیل، جاوید ناز، ارشد نوری، اشونی پاٹھک، ڈاکٹر رانو روحی، جاوید عتیقی، شیوم سونی، اجے مشرا اجے، عبید محسن، ارمان جبلپوری

ضلع کوآرڈینیٹر: راشد راہی

آپ سبھی بصد احترام مدعو ہیں۔

ڈاکٹر نصرت مہدی
ڈائریکٹر

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मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग के तत्वावधान में ज़िला अदब गोशा, जबलपुर द्वारा सिलसिला एवं तलाशे जौहर के तहत

व्याख्यान एवं रचनापाठ
रविवार, 19 अक्टूबर 2025

तलाशे जौहर : दोपहर 12:00 बजे सिलसिला : दोपहर 03:00 बजे
श्री जानकी रमण महाविद्यालय, आग़ा चौक, जबलपुर

मुख्य अतिथि
डॉ. अभिजात कृष्ण त्रिपाठी

विशिष्ट आमंत्रित वक्ता एवं शायर
ताहिर दमोही (दमोह), बाबू अनवर निज़ामी (जबलपुर)

स्थानीय शायर
सूरज राय सूरज, हेमराज राज़ सागरी, फ़ारूक़ अशरफ़, विनोद नयन, ख़ुर्शीद आलम,प्रतिभा पटेल, जावेद नाज़,अरशद नूरी, अश्विनी पाठक, डाॅ रानू रुही, जावेद अतीक़ी, शिवम सोनी,अजय मिश्रा अजय, उबेद मोहसिन, अरमान जबलपूरी

ज़िला समन्वयक : राशिद राही

आप सभी सादर साग्रह आमंत्रित हैं।

डॉ. नुसरत मेहदी
निदेशक

    ایم پی اردو اکادمی کے زیر اہتمام رشید اندوری کے اعزاز میں "شام غزل، کتاب پر گفتگو اور طرحی مشاعرہ" اندور میں منعقد م...
14/10/2025






ایم پی اردو اکادمی کے زیر اہتمام رشید اندوری کے اعزاز میں "شام غزل، کتاب پر گفتگو اور طرحی مشاعرہ" اندور میں منعقد

مدھیہ پردیش اردو اکادمی، سنسکرتی پریشد، محکمہ ثقافت کے زیر اہتمام اندور کے معروف ادیب و شاعر رشید اندوری کے اعزاز میں "شام غزل، کتاب پر گفتگو اور طرحی مشاعرہ" کا انعقاد 10 اکتوبر 2025 بروز جمعہ شام 6:00 بجے دی ایڈن ہوٹل ( سندر ) ، ساؤتھ تُکو گنج، پٹیل سرکل کے پاس، اندور میں کیا گیا۔

مدھیہ پردیش اردو اکادمی کی ڈائریکٹر ڈاکٹر نصرت مہدی نے پروگرام کے اغراض و مقاصد پر روشنی ڈالتے ہوئے کہا کہ رشید اندوری مدھیہ پردیش کی ادبی دنیا کی ایک معروف شخصیت اور اردو کے ایک ممتاز شاعر ہیں جن کی شاعری میں ہندوستانی ثقافت، شائستگی اور فکری بیداری جھلکتی ہے۔ ان کی غزلوں میں محبت، احتجاج اور انسانیت ایک ساتھ نظر آتے ہیں۔ مدھیہ پردیش اردو اکیڈمی کو فخر ہے کہ اندور میں ان کی شخصیت اور کارناموں پر سمینار منعقد کرکے ہم اردو ادب میں ان کی ادبی خدمات کو خراج تحسین پیش کر رہے ہیں۔ اس کے ساتھ ہی اکیڈمی کی کوشش ہے کہ طرحی مشاعرے کے ذریعے اندور کے نوجوان شاعروں کو اپنی صلاحیتوں کے اظہار اور اندور کے غزل گلوکار کو اپنے فن کے مظاہرے کا موقع فراہم ہو۔
ڈاکٹر نصرت مہدی کے خطاب کے بعد اندور کے استاد شاعر اور ادیب رشید اندوی کی ادبی خدمات کا اعتراف کرتے ہوئے ان کا اعزاز کیا گیا اور حافظ رفیق محسن نے ان کا منتخب کلام پیش کیا۔اس کے بعد ان کی حیات و خدمات پر مبنی ڈاکٹر شبانہ نکہت انصاری اور ڈاکٹر وسیم افتخار کی مرتبہ کتاب رشید اندوری : حیات شخصیت اور خدمات پر گفتگو ہوئی جس میں عزیز عرفان ( اندور ) اور ڈاکٹر وسیم افتخار ( برہان پور ) نے اظہار خیال فرمایا۔
عزیز عرفان نے کہا کہرشید صاحب کی شخصیت کی تشکیل میں علاوہ اُن کے مشاہدہ اور تجربہ کے؛ مطالعے کے ذریعے انگیز کی گئی علمیت کو بہت دخل ہے۔ مطالعہ کا ایسا شوق اور شعر و ادب کا ایسا ذوق اب قصہ پارینہ ہے ۔ کتاب ملکیت ہو یا مستعار، اچھی کتاب کے دل دادہ ہیں۔ مطالعہ ڈوب کر ، دروں بینی اور ژرف نگاہی سے کرتے ہیں۔ میں نے کم ایسوں کو دیکھا ہے جو پڑھی ہوئی کتاب کے اچھے جملے اور اشعار برسوں بعد بھی ہو بہو دہراسکتے ہیں۔
رشید اندوری کی شاعری اُن کی شخصیت ہی کی توسیع ہے ۔ اس لئے چند جملے اس باب میں بھی ۔ مجھے محسوس ہوتا ہے ؛ رشید اندوری کی شاعری میں مطالعہ اور حافظہ کی برکتیں ظاہر اور عیاں ہیں۔ فارسی ، عربی الفاظ کی آمیزش ترکیبیں اور تلمیحیں جا بجا اور بے تکلف استعمال ہوئی ہیں ۔ اس امتیاز نے شعر کو مزید اعتبار بخشا ہے ۔ صاحب طرز ہونے کا شرف بڑی ریاضت، محنت، کاوش اور جذبہ و اخلاص کی بدولت حاصل ہوتا ہے۔ میں یہ بات بلا تکلف کہہ سکتا ہوں کہ رشید صاحب کا شعر انہی مساعی کا ثمرہ ہے اور اسی لئے دور سے پہچانا جاتا ہے۔
ڈاکٹر وسیم افتخار نے کہا کہ رشید اندوری، اندور ہی نہیں بلکہ مدھیہ پردیش کی اہم اور مایہ ناز ادبی شخصیات میں سے ایک ہیں
اندور کے شعری و نثری، ادبی و سماجی سروکاروں میں ان کی ہستی محترم و مکرم، مستحکم و معظم اور بلند قامتی کے درجے پر فائز ہے ان کا بڑا کارنامہ ہے کہ انہوں نے مختلف ادبی تقاریب کے ذریعے اندور میں نثر کو سماعت کرنے کی ایک مستحکم روایت کا آغاز کیا انہوں نے اندور کے تخلیق کاروں اور فن کاروں کی کتابوں کو اشاعت کے مراحل سے گزارنے میں بڑی امداد کی ویسے رشید صاحب اندور کے اساتذہ کی تہذیب اور پچھلی شرافتوں کا جیتا جاگتا نمونہ ہیں شعروادب کی چلتی پھرتی انجمن ہیں شعروسخن کی جیتی جاگتی یونی ورسٹی ہیں نیز اندور کی ادبی تاریخ کے انسائیکلوپیڈیا ہیں اسی لئے ان کی شخصیت سرزمینِ اندور کے لئے سرمایۂ افتخار ہے
اس اجلاس کی نظامت کے فرائض جاوید عالم نے بحسن خوبی انجام دیے۔اس اجلاس کے بعد دوسرے اجلاس میں رشید اندوری کے مصرعوں پر مبنی طرحی مشاعرہ منعقد ہوا جس میں نو جوان شعراء نے غزلیں پیش کیں۔ اس مشاعرے کی صدارت ڈاکٹر عزیز عرفان نے فرمائی۔ جن شاعروں نے غزلیں کہیں ان کے نام اور اشعار درج ذیل ہیں :

آپ نے مرے لقمے تنگ کر دیے لیکن!
برکتیں خدا بخشے آپ کے نوالوں میں!!
اشفاق رشید

کس طرح توڑ دی تونے یہ محبت کی قلم
تیرے ہاتھوں میں تو منصف کا ترازو بھی نہیں
پرمیت سنگھ "میت"

سب تجھے ڈھونڈنے لگتے ہیں مرے مصرعوں میں
اب تو غزلوں میں ترے ذکر کی خوشبو بھی نہیں
منظور دیپالپوری

غرق ہونے لگتی ہے تیرگی اجالوں میں
رنگ بھرنے لگتا ہوں جب ترے خیالوں میں
آدتیہ زرخیر

بارش ایسی تھی کہ سیلاب تھا ہر دامن میں
خشکی ایسی ہے کہ اب آنکھ میں آنسو بھی نہیں
نعمان علی

میں نے دیکھا ہے تری آنکھ کو تر ہوتے ہوئے
اس حقیقت کو کوئی دوسرا پہلو بھی نہیں
نشیکا ناگر

پتا چلے کہ غلامِ نبی کی میت ہے،
کچھ اس طرح میرے مالک میرا کفن مہکے۔
جنید احمد

تجھ کو لے آئے کوئی خشک چمن میری طرف
جب ترے پاس سے گزرے تری خوشبو بھی نہیں
پرنجل یادو

وصل کی آگ جلا دیتی ہے جسموں کو مگر
اس شبِ ہجر کے صحرا میں ذرا لو بھی نہیں
ندیم کاوِش

جیو تو اس طرح جیو، ایک مثال بن جاؤ
مرو تو موت کرے، رشک اور کفن مہکے
وشال شرما
طرحی مشاعرے کے بعد آخری اجلاس میں شام غزل کے تحت معروف غزل گلوکار گرومیت سنگھ ڈنگ ( اندور ) نے اپنی سحر انگیز آواز میں غزلوں کی پیشکش دے کر سامعین کو وجد آفریں کردیا۔ انھوں نے رشید اندوری کی دو غزلوں کے ساتھ درج ذیل غزلیں پیش کیں:
1.ہم نشینوں سے دور کتنا ہے
2. جانے کس بلندی سے گرا ہوں
3. جب بھی کسی نگاہ نے، موسم سجائے ہیں - ندا فاضلی
4. مجاز کیسا کہاں حقیقت ابھی تجھے کچھ خبر نہیں ہے - اصغر گونڈوی
5. مجھ دیوانے کو نہ اب تک میرے نام سے جانے لوگ - انیس
6. بتوں نے نہ کیں آشنائی کی باتیں - ظفر
اس پروگرام میں مقامی کو آرڈینیٹر تجدید ساقی کا تعاون بھی شامل رہے گا۔
پروگرام کے آخر میں ڈاکٹر نصرت مہدی نے تمام شرکاء کا شکریہ ادا کیا۔

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मप्र उर्दू अकादमी द्वारा "शाम-ए-ग़ज़ल पुस्तक चर्चा एवं तरही मुशायरा " आयोजित

मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग द्वारा रशीद इंदौरी के एज़ाज़ में "शाम-ए-ग़ज़ल पुस्तक चर्चा एवं तरही मुशायरा" का आयोजन 10 अक्तूबर, 2025 | शाम 06:00 बजे द् ईडन होटल (सुन्दर)सभागार , साउथ तूकोगंज, पटेल सर्किल के पास, इंदौर में किया गया।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ नुसरत मेहदी ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रशीद इंदौरी मध्यप्रदेश के सहित्यिक जगत की जानी मानी हस्ती और उर्दू के ऐसे विशिष्ट शायर हैं जिनकी शायरी में भारतीय संस्कृति, शालीनता और वैचारिक जागरूकता झलकती है। उनकी ग़ज़लों में प्रेम, प्रतिरोध और मानवता एक साथ दिखाई देते हैं। मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी को गर्व है कि इंदौर में उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर सेमिनार आयोजित करके हम उर्दू साहित्य में उनकी अदबी ख़िदमात को ख़िराजे तहसीन पेश कर रहे हैं इसके साथ ही अकादमी का प्रयास है कि तरही मुशायरे के माध्यम से इंदौर के युवा शायरों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने और इंदौर के ग़ज़ल गायक को उनकी कला का प्रदर्शन करने का अवसर मिले।डॉ नुसरत मेहदी के वक्तव्य के बाद इंदौर के उस्ताद शायर रशीद इंदौरी के साहित्यिक योगदान के लिए उनका अभिनंदन किया गया। और हाफ़िज़ रफ़ीक़ मोहसिन ने रशीद इंदौरी का मुंतख़ब कलाम पेश किया। उसके पश्चात उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित डॉ. शबाना निकहत अंसारी और डॉ. वसीम इफ़्तिख़ार अंसारी द्वारा संकलित पुस्तक "रशीद इंदौरी-हयात, शख़्सियत और ख़िदमात" पर अज़ीज़ इरफान (इंदौर) एवं डॉ. वसीम इफ़्तिख़ार (बुरहानपुर) ने वक्तव्य प्रस्तुत किये।
अज़ीज़ इरफ़ान ने कहा कि रशीद साहब की शख़्सियत की संरचना में उनके अवलोकन और अनुभव के अलावा, अध्ययन के माध्यम से प्रेरित विद्वता का बहुत बड़ा योगदान है। अध्ययन का ऐसा शौक़ और कविता व साहित्य की ऐसा रुचि अब पुरानी बात हो चुकी है। किताब चाहे स्वयं की हो या किसी से पढ़ने के लिए उधार ली गई हो, अच्छी किताब के वे दीवाने हैं। अध्ययन वे गहराई से, अंतर्दृष्टि और सूक्ष्म दृष्टि के साथ करते हैं। मैंने कम ही ऐसे लोगों को देखा है जो पढ़ी हुई किताब के अच्छे वाक्य और शेर वर्षों बाद भी ज्यों के त्यों दोहरा सकते हैं। रशीद इंदौरी की शायरी उनकी शख़्सियत का ही विस्तार है, फ़ारसी, अरबी शब्दों का मिश्रण, संयोजन और तल्मीहें (संकेतात्मक उल्लेख) जगह-जगह और सहजता से इस्तेमाल हुए हैं। इस विशेषता ने उनके शेर को और अधिक विश्वसनीयता प्रदान की है। विशिष्ट शैली का गौरव बड़ी साधना, मेहनत, प्रयास और जुनून व ईमानदारी के बल पर प्राप्त होता है। मैं बिना किसी झिझक के कह सकता हूँ कि रशीद साहब का शेर इन्हीं प्रयासों का फल है और इसी कारण दूर से पहचाना जाता है।
डॉ. वसीम इफ़्तिख़ार ने कहा कि
रशीद इंदौरी न केवल इंदौर, बल्कि मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध साहित्यिक हस्तियों में से एक हैं। इंदौर के काव्यात्मक और गद्यात्मक, साहित्यिक और सामाजिक सरोकारों में उनकी शख़्सियत सम्मानित, पूजनीय, सुदृढ़ और उच्च क़द की है। उनका सबसे बड़ा कारनामा यह है कि उन्होंने विभिन्न साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से इंदौर में गद्य को सुनने की एक सुदृढ़ परंपरा की शुरुआत की। उन्होंने इंदौर के रचनाकारों और कलाकारों की किताबों को प्रकाशन के चरणों से गुज़रने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की। वैसे तो रशीद साहब इंदौर के शिक्षकों की सभ्यता और पुरानी शालीनता के जीवंत उदाहरण हैं। वे शेरो अदब की चलती-फिरती अंजुमन हैं, शेरो सुख़न की जीती जागती यूनिवर्सिटी हैं, साथ ही इंदौर के साहित्यिक इतिहास का इनसाइक्लोपीडिया हैं।
इस सत्र का संचालन जावेद आलम द्वारा किया जाएगा।

दूसरे सत्र में रशीद इंदौरी के मिसरों पर आधारित तरही मुशायरा आयोजित हुआ जिसमें युवा शायरों ने उनके मिसरों पर ग़ज़लें पेश कीं। जिन शायरों ने कलाम पेश किया उनके नाम और अशआर निम्न हैं।

आपने मिरे लुक़्मे तंग कर दिए लेकिन !
बरकतें ख़ुदा बख्शे आप के निवालों में !!
अशफ़ाक़ रशीद

किस तरह तोड़ दी तूने ये मुहब्बत कि क़लम
तेरे हाथों में तो मुंसिफ का तराज़ू भी नहीं
-परमीत सिंह "मीत"

सब तुझे ढूँढने लगते हैं मिरे मिसरों में
अब तो ग़ज़लों में तिरे ज़िक्र की ख़ुशबू भी नहीं
मंज़ूर देपालपुरी

ग़र्क होने लगती है तीरगी उजालों में
रंग भरने लगता हूँ जब तिरे ख़्यालों में
आदित्य ज़रख़ेज़

बारिश ऐसी थी कि सैलाब था हर दामन में
ख़ुश्क़ी ऐसी है कि अब आँख में आँसू भी नहीं
नोमान अली,

मैं ने देखा है तेरी आँख को तर होते हुए
इस हक़ीक़त का कोई दूसरा पहलू भी नहीं
– निशिका नागर

पता चले कि ग़ुलाम-ए-नबी की मैय्यत है,
कुछ इस तरह मेरे मालिक मेरा कफ़न महके।
जुनैद एहमद

तुझको ले आए कोई ख़ुश्क चमन मेरी तरफ़
जब तिरे पास से गुज़रे तिरी ख़ुशबू भी नहीं
प्रांजल यादव,

वस्ल की आग जला देती है जिस्मों को मगर
इस शब-ए-हिज्र के सहरा में ज़रा लू भी नहीं
~ नदीम काविश

जियो तो ऐसे जियो, एक मिसाल बन जाओ
मरो तो मौत करे, रश्क और क़फ़न महके
विशाल शर्मा

अंतिम सत्र में शाम-ए-ग़ज़ल के तहत सुप्रसिद्ध ग़ज़ल गायक गुरुमीत सिंह डंग (इंदौर) ने अपनी मधुर आवाज़ में ग़ज़लों की मनमोहक प्रस्तुति दे कर श्रोताओं को मन्त्रमुग्ध कर दिया।उन्होंने रशीद इंदौरी की दो ग़ज़लों के साथ निम्न ग़ज़लें प्रस्तुत कीं।
1. हम नशीनों से दूर कितना है
2. न जाने किस बुलंदी से गिरा हूँ -
3. जब भी किसी निगाह ने, मौसम सजाये हैं - निदा फ़ाज़ली
4. मजाज़ कैसा कहाँ हक़ीक़त अभी तुझे कुछ ख़बर नहीं है- असग़र गोंडवी
5. मुझ दीवाने को ना अभी तक मेरे नाम से जाने लोग - अनीस
6. बुतों ने न की आश्नाई की बातें - ज़फ़र

कार्यक्रम में स्थानीय समन्वयक तजदीद साक़ी का सहयोग भी शामिल रहा ।
कार्यक्रम के अंत में डॉ नुसरत मेहदी ने सभी अतिथियों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

       مدھیہ پردیش اردو اکادمی، سنسکرتی پریشد، محکمہ ثقافت کے زیر اہتمامشام غزل، کتاب پر گفتگو اور طرحی مشاعرہ10 اکتوبر ...
07/10/2025







مدھیہ پردیش اردو اکادمی، سنسکرتی پریشد، محکمہ ثقافت کے زیر اہتمام

شام غزل، کتاب پر گفتگو اور طرحی مشاعرہ
10 اکتوبر 2025 بروز جمعہ شام 6:00 بجے
دی ایڈن ہوٹل ( سندر ) ، ساؤتھ تُکو گنج، پٹیل سرکل کے پاس، اندور
میں منعقد کیا جا رہا ہے۔

10 اکتوبر 2025 بروز جمعہ شام 6:00

جناب رشید اندوی کی ادبی خدمات کا اعتراف اور ان کی حیات و خدمات پر مبنی ڈاکٹر شبانہ نکہت انصاری اور ڈاکٹر وسیم افتخار کی مرتبہ کتاب رشید اندوری : حیات شخصیت اور خدمات پر گفتگو

مقررین
عزیز عرفان ( اندور )، ڈاکٹر وسیم افتخار ( برہان پور )
نظامت : جاوید عالم

جناب رشید اندوری کے مصرعوں پر مبنی طرحی مشاعرہ

مدعو نو جوان شعراء
اشفاق رشید | پرمیت سنگھ میت | منظور دیپال پوری | آدتیہ زرخیز | نعمان علی|نشکا نا گر | جنید احمد | پرانجل یادو | ندیم خان | وشال شرما
مقامی کو آرڈینیٹر : تجدید ساقی

شام غزل (غزلوں کی پیشکش )
غزل گلوکار : گرومیت سنگھ ڈنگ ( اندور )

اس پروگرام میں آپ سبھی بصد احترام مدعو ہیں۔

ڈاکٹر نصرت مہدی
ڈائریکٹر

---------------

मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग द्वारा
शाम-ए-ग़ज़ल,
पुस्तक चर्चा एवं तरही मुशायरा

10 अक्तूबर, 2025 | शाम 06:00 बजे द् ईडन होटल (सुन्दर), साउथ तूकोगंज, पटेल सर्किल के पास, इंदौर में आयोजित है।

10 अक्तूबर, 2025 | शाम 06:00 बजे

श्री रशीद इंदौरी का अभिनंदन एवं उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित डॉ. शबाना निकहत अंसारी और डॉ. वसीम इफ़्तिख़ार द्वारा संकलित पुस्तक
"रशीद इंदौरी-हयात, शख़्सियत और ख़िदमात"
पर चर्चा

वक्तागण
अज़ीज़ इरफ़ान (इंदौर), डॉ. वसीम इफ़्तिख़ार (बुरहानपुर)

संचालनः जावेद आलम

श्री रशीद इंदौरी के मिसरे पर आधारित तरही मुशायरा
आमंत्रित युवा शायर
अशफ़ाक़ रशीद | परमीत सिंह मीत | मंजूर देपालपुरी | आदित्य ज़रख़ेज़|नोमान अली | निशिका नागर | जुनेद अहमद | प्रांजल यादव | नदीम खान | विशाल शर्मा
स्थानीय समन्वयक : तजदीद साक़ी

शाम-ए-ग़ज़ल
(ग़ज़लों की प्रस्तुति)
ग़ज़ल गायकः गुरुमीत सिंह डंग (इंदौर)

आप सभी सादर साग्रह आमंत्रित है।
डॉ. नुसरत मेहदी

निदेशक

      مدھیہ پردیش اردو اکیڈمی، سنسکرتی پر یشد محکمہ ثقافت کے زیر اہتمامضلع ادب گوشہ شیوپورکے ذریعے سلسلہ کے تحتمشہور شاع...
03/10/2025






مدھیہ پردیش اردو اکیڈمی، سنسکرتی پر یشد محکمہ ثقافت کے زیر اہتمام

ضلع ادب گوشہ شیوپورکے ذریعے سلسلہ کے تحت
مشہور شاعر اختر حسن وحشی کو منسوب
ادبی و شعری نشست
بتاریخ 5 اکتوبر 2025 بروز اتوار
سلسلہ : ۱۲ بجے دوپہر

سوامی ورجانند سرسوتی انگلش اسکول ، پل دروازه، شیو پور

مہمانان ذی وقار
سنجے مہانا ( وائس چیئر مین ، نگر پالیکا، شیو پور )
پروفیسر آصف قریشی

خصوصی مقرر
ڈاکٹر اشفاق عرشی ( موضوع : اختر حسن وحشی فن و شخصیت )

مقامی شعراء
شاکر علی شاکر |ڈاکٹر ایوب خان غازی |مانگی لال مرمٹ |پربھات پرنے|رفیق گردھر پوری |سعید خان چراغ |حمید بالا پوری |ترن مشرا |رفیق محمد |ارشاد حق |طالب طوفانی | انور امروہی |گوپال رگھونشی|عرفان اختر |راجیندر گوڑ

ضلع کو آرڈینیٹر: انور غافل

آپ سبھی بصد احترام مدعو میں

ڈاکٹر نصرت مہدی
ڈائریکٹر

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मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग के तत्वावधान में
ज़िला अदब गोशा, श्योपुर के द्वारा
सिलसिला के अन्तर्गत
प्रसिद्ध शायर अख़्तर हसन वहशी को समर्पित

स्मरण एवं रचनापाठ
रविवार, 5 अक्टूबर, 2025
सिलसिला : दोपहर 12:00 बजे
स्वामी विरजानंद सरस्वती इंग्लिश स्कूल, पुल दरवाज़ा, श्योपुर

विशिष्ट अतिथिगण
संजय महाना (नगर पालिका उपाध्यक्ष, श्योपुर)

प्रो. आसिफ़ कुरैशी

विशिष्ट वक्ता
डॉ. अशफ़ाक़ अर्शी (विषय : अख्तर हसन वहशी व्यक्तित्व एवं कृतित्व)

स्थानीय शायर
शाकिर अली शाकिर | डॉ. अय्यूब ख़ान ग़ाज़ी | मांगीलाल मरमिट।रफ़ीक़ गिरधरपुरी | प्रभात प्रणय | सईद ख़ान चराग़ | हमीद बालापुरी।तरूण शर्मा | रफ़ीक़ मोहम्मद। इरशाद हक़ | तालिब तूफ़ानी ।अनवर अमरोही | गोपाल रघुवंशी | इरफ़ान अख़्तर | राजेन्द्र गौड़

ज़िला समन्वयक : अनवर ग़ाफ़िल

आप सभी सादर साग्रह आमंत्रित हैं।

डॉ. नुसरत मेहदी
निदेशक

انا للہ وانا الیہ راجعونڈاکٹر یونس فرحت صاحب کے انتقال کی خبر افسوس ناک ہے۔ مدھیہ پردیش اردو اکیڈمی ان کے انتقال پر تعزی...
25/09/2025

انا للہ وانا الیہ راجعون

ڈاکٹر یونس فرحت صاحب کے انتقال کی خبر افسوس ناک ہے۔ مدھیہ پردیش اردو اکیڈمی ان کے انتقال پر تعزیت کا اظہار کرتی ہے اور دعا گو ہے کہ اللہ مرحوم کی مغفرت فرمائے اور اہلِ خانہ کو صبر عطا کرے ۔
آمین

ڈاکٹر نصرت مہدی
ڈائریکٹر
مدھیہ پردیش اردو اکیڈمی

      مدھیہ پردیش اردو اکادمی، سنسکرتی پریشد، محکمہ ثقافت کے زیر اہتمامسیوا پرو پکھواڑا کے تحت وکست بھارت کے تصور پر مبن...
25/09/2025







مدھیہ پردیش اردو اکادمی، سنسکرتی پریشد، محکمہ ثقافت کے زیر اہتمام
سیوا پرو پکھواڑا کے تحت
وکست بھارت کے تصور پر مبنی

مذاکرہ اور مشاعرہ
30 ستمبر، 2025 کو شام 5:30 بجے ملن واٹیکا ، پدم دھر کالونی ، ڈھیکہا، ریوا میں منعقد ہے۔

مذاکره
موضوع : وکست بھارت کی تعمیر میں ادب کا کردار

مقررین
پروفیسر عباس رضا نیر لکھنؤ
ڈاکٹر لال جی گوتم ۔ ریوا
ڈاکٹر نصرت مہدی
(ڈائر یکٹر ، ایم پی اردوا کا دمی ، بھوپال )

کل ہند مشاعرہ
مد عو شعراء حضرات
پروفیسر عباس رضا نیر ( لکھنؤ ) | افضل منگلوری (روڑ کی) | حامد بهساولی ( بھساول) شرف نانپاروی (دلی ) | افضل الہ آبادی ( پریاگ راج) | نکہت امروہوی ( امروہہ )
ریوا سے: طہور منصوری نگاه | رفیق ریوانی | جام ریوانی | حشمت ریوانی| ڈاکٹر پرمود جین | ستیندر سینگر | گیتا شکلا | انورادھا انجینی

مقامی کو آرڈینیٹر سلیم رضا

اس پروگرام میں آپ سبھی بصد احترام مدعو ہیں۔

ڈاکٹر نصرت مہدی
ڈائریکٹر

نوٹ : طلبا ، ریسرچ اسکالر ، ٹیچر اور پروفیسر حضرات آنلائن آف لائن رجسٹریشن کرا سکتے ہیں پروگرام میں شرکت کرنے پر ٹریفکیٹ دیے جائیں گے۔ رجسٹریشن کا لنک درج ذیل ہے 👇👇👇

https://forms.gle/Sj8wr1hQL24mEQc7A
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मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग द्वारा
सेवा पर्व पखवाड़ा में
विकसित भारत संकल्पना पर केन्द्रित

विमर्श एवं मुशायरा
30 सितम्बर, 2025 | शाम 05:30 बजे
मिलन वाटिका, पद्मधर कॉलोनी, ढेकहा, रीवा (म.प्र.)
में आयोजित है।

संवाद/विमर्श
विषय : विकसित भारत के निर्माण में साहित्य की भूमिका

वक्ता:
प्रो. अब्बास रज़ा नय्यर, लखनऊ
डॉ. लालजी गौतम, रीवा
डॉ. नुसरत मेहदी, (निदेशक - म.प्र. उर्दू अकादमी, भोपाल)

मुशायरा
आमंत्रित शायर
सर्वश्री प्रो. अब्बास रज़ा नय्यर (लखनऊ) | अफ़ज़ल मंग्लोरी (रूड़की) हामिद भुसावली (भुसावल) । शरफ़ नानपारवी (दिल्ली) अफ़ज़ल इलाहाबादी (प्रयागराज) | सुश्री निकहत अमरोहवी (अमरोहा )
रीवा सेः- तहूर मंसूरी निगाह | रफ़ीक़ रीवानी | जाम रीवानी | हशमत रीवानी| डॉ. प्रमोद जैन | सत्येन्द्र सेंगर | गीता शुक्ला | अनुराधा अंजनी

स्थानीय समन्वयक : सलीम रज़ा

आयोजन में आप सभी सादर आमंत्रित है।

डॉ. नुसरत मेहदी
निदेशक

नोट : संवाद/विमर्श में विद्यार्थी, शोधार्थी, अध्यापक, प्राध्यापक पंजीयन करा सकते हैं। उपस्थिति पश्चात प्रमाण पत्र दिए जाएंगे।

पंजीयन का लिंक नीचे दिया जा रहा है 👇👇👇

https://forms.gle/Sj8wr1hQL24mEQc7A

   بڑا عجیب ہے کردار کا یہ دوہرا پن مرے لبوں پہ ہنسی ہے اداس ہوں پھر بھیबड़ा अजीब है किरदार का ये दोहरापनमिरे लबों पे हं...
24/09/2025




بڑا عجیب ہے کردار کا یہ دوہرا پن
مرے لبوں پہ ہنسی ہے اداس ہوں پھر بھی

बड़ा अजीब है किरदार का ये दोहरापन
मिरे लबों पे हंसी है उदास हूं फिर भी
Zafar Nasimi Sahib

Aaj Bhopal ke Ustaad Shayar Zafar Nasimi Sahib ka Youm e viladat hai.. Is mauqe par hum Mdhya Pradesh Urdu Academy ki janib se unhein Khiraaj e aqeedat pesh karte hain.



ظفر نسیمی بیگمات و جھیلوں کے خوبصورت شہر بھوپال کی بزرگ ہستیوں میں مقتدر شخصیت کے مالک ہیں.. ان کا شعری سفر طویل ہے اور ان کا شمار بھوپال کے استاد شعرا میں ہوتا تھا۔

ظفر نسیمی کی ولادت 24 ستمبر 1934 کو بھوپال کے ایسے گھرانے میں ہوئی جہاں خالص دینی ماحول تھا.. آپ کی ابتدائی تعلیم و تربیت اور ذہنی نشو نما ایسے ماحول میں ہوئی جہاں شعر و ادب کا ذکر نہیں تھا. کالج میں بھی آپ کامرس اور اقتصادیات (اکانومکس) کے طالب علم تھے لیکن آپ کو ذوق شعر فطرت کی طرف سے ودیعت ہوا تھا اور آپ لڑکپن میں ہی بغیر کسی استاد کے موزوں شعر کہنے لگے تھے. آپ بھوپال میں عصری تعلیم کی پہلی درس گاہ گورنمنٹ حمیدیہ کالج کے قیام کے نہ صرف یہ کہ گواہ ہیں بلکہ پہلے بیچ کے طالب علم ہیں. آپ نے وہیں سے بی کام اور ایم اے کیا. کالج کے دوران تعلیم ہر میگزین میں آپ کی تخلیقات شائع ہوتی تھیں. حمیدیہ کالج کا وہ دور سنہرا دور تھا. دنیائے اردو کے آفتاب و ماہتاب جاں نثار اختر، صفیہ اختر، ڈاکٹر گیان چند جین، ڈاکٹر ابو محمد سحر اور ڈاکٹر سلیم حامد رضوی اس دوران کالج کے اساتذہ رہے..
جاں نثار اختر کالج کے میگزین کے نگراں تھے. ظفر نسیمی اپنی غزلیں بغرض اصلاح اور پھر اشاعت کے لیے انھیں دیا کرتے تھے جو ویسی ہی شائع ہوجایا کرتی تھیں. بعد میں کچھ غزلیں ویسے ہی جاں نثار اختر کی خدمت میں بغرض اصلاح پیش کیں لیکن انھوں نے یہ کہہ کر کہ اصلاح کی ضرورت نہیں ہے، واپس کردیں. اس طرح آپ جاں نثار اختر کے فارغ الاصلاح شاگرد ہیں.

ظفر نسیمی کی شاعری محض تفریح طبع نہیں ہے اس میں عہد کے زخموں کی نشاندہی ایک مخصوص شعری انداز میں موجود ہے. آپ کے کلام میں اکثر ایسا لطیف طنز ہوتا ہے جو غم کو خندہ پیشانی سے سہہ لینے کے بعد ہلکی ٹیس کی شکل میں ظاہر ہوتا ہے. ظفر نسیمی واقعی بڑے شاعر ہیں.. مشاہیر ادب نے ان کی شاعری کا اعتراف کیا ہے..

معروف ادیب و محقق ڈاکٹر مختار شمیم ان کے متعلق یوں رقمطراز ہیں کہ " اس میں شک نہیں کہ ظفر نسیمی شعر در شعر ان جہانوں کی سیر کراتے ہیں جہاں سر سبز و شاداب مناظر اپنی طرفگی و نیرنگی کے باعث نگاہ و دل کو سکون بخشتے ہیں. اس حق شناس شاعر کا کلام اپنی لَے اور تاثر میں اپنا جواب آپ ہے. فنی اعتبار سے بھی ظفر نسیمی نے اکثر کمال کر دکھایا ہے کہ بعض معمولی سے لفظوں کو نئی معنویت سے ہم آہنگ کیا ہے. "

معروف ادیب و شاعر ضیا فاروقی ان کے بارے میں لکھتے ہیں کہ" ظفر نسیمی صاحب نہ صرف یہ کہ غزل کی جمالیات اور اس کی قدیم روایات سے آشنا ہیں بلکہ جدید رمز و کنایات سے بھی ان کی واقفیت بہت گہری ہے. اس لیے رمز کے تراشے ہوئے شعری پیکروں میں جہاں نئے زمانوں کی تپش ہے وہیں قدیم اصطلاحات کے ہفت رنگ مناظر بھی انھوں نے محاورات، محاکات، مصطلحات اور ضرب المثال کا جو فنکارانہ اور خلاقانہ استعمال کیا ہے اس میں تنوع بھی ہے اور جاذبیت بھی. "

معروف ادیب رؤف خیر فرماتے ہیں کہ" ظفر نسیمی محض قافیہ کے امکانات چمکانے کے چکر میں ( حضرت فراق کی طرح) تریسٹھ تریسٹھ اشعار سے ظرف و صبر نہیں آزماتے، چھ سات اشعار میں ہی دل و دماغ میں پکتا ہوا لاوا انڈیل کر رکھ دیتے ہیں.

معروف شاعرہ ڈاکٹر نصرت مہدی ان کے بارے میں لکھتی ہیں کہ" ظفر نسیمی کا زبان و بیان کی پختگی، سادگی و سلاست اور نیا پن ذہن کو متوجہ کرتا ہے اور دیرپا اثر چھوڑتا ہے. انھوں نے ایک ذہین بیدار مغز شاعر کی طرح انسانیت کے خواب دیکھے ہیں. ملک و بین الاقوامی صورت حال، سماج، تہذیب، سیاست اور اخلاقی زوال کے منظر نامے کو انھوں نے اپنے وسیع مطالعے اور گہرے وژن سے شعروسخن میں ڈھالا ہے. "

#پیشکش: مدھیہ پردیش اردو اکادمی

     مدھیہ پردیش اردو اکیڈمی کے زیر اہتمام شیوپوری میں "سلسلہ و تلاش جوہر" کے تحت لکھن لال کھرے کو منسوب ادبی و شعری نشس...
24/09/2025







مدھیہ پردیش اردو اکیڈمی کے زیر اہتمام شیوپوری میں "سلسلہ و تلاش جوہر" کے تحت لکھن لال کھرے کو منسوب ادبی و شعری نشست کا انعقاد
مدھیہ پردیش اردو اکیڈمی، سنسکرتی پریشد، محکمۂ ثقافت کے زیر اہتمام ضلع ادب گوشہ، شیوپوری کے ذریعے ’’سلسلہ اور تلاش جوہر‘‘کے تحت شیوپوری کے مشہور ادیب و محقق ڈاکٹر لکھن لال کھرے کومنسوب ادبی و شعری نشست کا انعقاد 20 ستمبر ، 2025 کو سرسوتی ششو مندر اسکول، شیوپوری میں ضلع کوآرڈینیٹر پردیپ اوستھی کے تعاون سے کیا گیا۔

شیوپوری میں منعقدہ "سلسلہ اور تلاشِ جوہر" کے لیے مدھیہ پردیش اردو اکیڈمی کی ڈائریکٹر ڈاکٹر نصرت مہدی نے اپنے پیغام میں پروگرام کے مقاصد پر روشنی ڈالی۔ انہوں نے کہا کہ شیوپوری میں منعقدہ "سلسلہ اور تلاشِ جوہر" ادبی و شعری نشست کا مقصد ڈاکٹر لکھن لال کھرے جیسے ہمہ جہت ادیبوں کی خدمات کو یاد کرتے ہوئے نئی نسل کو ان کے کاموں سے روشناس کرانا، تلاشِ جوہر مقابلے کے ذریعے نوجوان شاعروں اور تخلیق کاروں کو پلیٹ فارم دے کر ان کی صلاحیتوں کو نکھارنا، اور سینئر اور نئے تخلیق کاروں کے ذریعے اپنے کلام کی پیش کش اور ادبی مکالمے کے ذریعے زبان، ادب اور ثقافت کے تسلسل کو برقرار رکھنا ہے۔
شیوپوری ضلع کے کوآرڈینیٹر پردیپ اوستھی نے بتایا کہ ادبی و شعری نشست دو اجلاس پر مبنی تھی ۔ پہلے اجلاس میں دوپہر 3:00بجے تلاش جوہر منعقد ہوا جس میں ضلع کے نئےتخلیق کاروں نے فی البدیہہ مقابلے میں حصہ لیا۔ حکم صاحبان کے طور پر گنا کے مشہور شاعر ڈاکٹر اشوک گویل اور شیوپوری کے استاد شاعر عشرت گوالیاری موجود تھے جنہوں نے نئے تخلیق کاروں کو شعر کہنے کے لیے دو طرحی مصرعے دیے۔ دیے گئے مصرعوں پر نئےتخلیق کاوں کے ذریعے کہی گئی غزلوں اور ان کی پیشکش کی بنیاد پر کلپنا سنوریانے پہلا، سنجے شاکیہ نے دوسرا، اور شرد جین نے تیسرا مقام حاصل کیا۔پہلا، دوسرا، اور تیسرا مقام حاصل کرنے والے تینوں فاتحین کو اردو اکیڈمی کی طرف سے بالترتیب 3000/-، 2000/-، اور 1000/- روپے کی انعامی رقم اور سرٹیفکیٹ دیے جائیں گے۔
دوسرے اجلاس میں شام 5:00 بجے سلسلہ کے تحت ادبی و شعری نشست کا انعقاد ہوا جس کی صدارت شیوپوری کے استاد شاعر عشرت گوالیاری نے کی۔ اس موقع پر مہمانان ذی وقار کے طور پر ڈاکٹر اشوک گویل، پرمود بھارگو، خصوصی مقرر کے طور پر آشوتوش شرما اور مقامی مقرر کے طور پر یوسف احمد قریشی اسٹیج پر جلوہ افروز رہے ۔ اس اجلاس کی شروعات میں شیوپوری کے مشہور ادیب ڈاکٹر لکھن لال کھرے کی حیات و خدمات پر آشوتوش شرما اور یوسف قریشی نے روشنی ڈال کر انہیں خراج عقیدت پیش کیا۔
آشوتوش شرما نے کہا کہ لکھن لال کھرے نے بندیل کھنڈی زبان میں شاندار کام کیا ہے، چاہے رام چرت مانس کے کچھ خاص واقعات ہوں، مداری کی سوانح حیات ہو، یا لوک فن پر مبنی ان کی کتاب ہو، سب میں ان کی صلاحیتیں نظر آتی ہیں ۔ چاہے بزمِ اردو کے پروگرام ہوں یا لیکھک سنگھ کے، ان کی ہمیشہ شرکت اور تعاون رہتا تھا، اور وہ ہمیشہ حوصلہ افزائی بھی کرتے تھے۔ نہ جانے کتنے غریب بچوں کو تعلیم کی سہولیات فراہم کرنے والے، اور کتنے ہی طلبہ کو پی ایچ ڈی کروانے والے لکھن لال کھرے بھلے ہی آج ہمارے درمیان موجود نہ ہوں، لیکن ان کے کام، ان کا طریقہ کار، ان کے خیالات اور ان کی لکھی ہوئی کتابوں کے ذریعے وہ ہمارے ساتھ ہی ہیں۔
وہیں یوسف احمد قریشی نے کہا کہ ڈاکٹر لکھن لال کھرے ہمہ جہت شخصیت کے مالک تھے۔ ان کا شمار شیوپوری کے اہم ادیبوں میں ہوتا تھا۔ وہ ایک ملنسار، ادب سے محبت کرنے والے اور نئے تخلیق کاروں کی حوصلہ افزائی، سرپرستی اور ہر طرح سے مدد کرنے والے نیک دل انسان تھے، اور یہ بات مسلم ہے کہ جو شخص اچھا انسان نہیں ہوتا وہ اچھا ادیب بھی نہیں ہو سکتا، یعنی اچھا انسان اور اچھا ادیب ہونا ایک دوسرے کے لیے لازم و ملزوم ہیں۔ وہ شیوپوری کی کئی ادبی تنظیموں سے وابستہ تھے اور انہوں نے شیوپوری سے دنیا بھر کے تقریباً 14 ممالک تک جانے والی ڈاکٹر مہندر اگروال کی سہ ماہی جریدے 'نئی غزل' کے مدیر کی حیثیت سے بھی اپنی خدمات انجام دیں اور اردو اور ہندی کے شاعروں اور ادیبوں کی تخلیقات کو ادبی جرائد میں شائع کرنے میں اہم کردار ادا کیا۔
شعری نشست میں جن شعراء نے اپنا کلام پیش کیا ان کے نام اور اشعار درج ذیل ہیں :

نام ہر شے پہ تمہارا ہے ہمارا کیا ہے
ہم سے بچوں کو یہ شکوہ ہے ہمارا کیا ہے
اب تو ہمسائے سے کہنے لگے بچے اپنے
جب تلک باپ ہمارا ہے، ہمارا کیا ہے
رفیق عشرت گوالیاری

دعا ہے رب سے سلامت رہیں جہاں میں سب
کسی کا نام بھی ان پتھروں پہ جچتا نہیں
ڈاکٹر اشوک گویل

دل میں تاثیر محبت کی اتر آنے سے
ہاں کسی شخص میں بدلاؤ بھی ہو سکتا ہے
محمد یعقوب صابر

دیکھے گا مبین اس دم ہر آدمی عزت سے
نفرت کے اندھیروں میں گر دیپ جلاؤگے
مبین احمد مبین

خدا خود کو سمجھتا ہے وہی نادان ہے کنکر
حویلی جو چمکتی تھی وہی سونی پڑی دیکھی
ستیش دکشت کنکر

ہے تمنا اگر اجالوں کی
تو حفاظت کرو چراغوں کی
بھول مت جانا تم زمین اپنی
بات کرتے ہوئے ستاروں کی
سبھاش پاٹھک ضیا

جو وطن کی آبرو ٹھکرائے گا،
ایک دن بے موت مارا جائے گا
شیام بہاری سرل

کوئی پرچی بھی میرے نام کی نہیں نکلی
دلِ سکون کے، پیغام کی نہیں نکلی
بھری پڑی ہے ہتھیلی میری، لکیروں سے
کوئی لکیر میرے کام کی نہیں نکلی
سوربھ تیواری

پرندے آب و دانہ چاہتے ہیں
فقط اک آشیانہ چاہتے ہیں
سلیم بادل

دل کی دہلیز پر آتے جاتے رہو
پریم پھولوں سے آنگن سجاتے رہو
ہیں اجالے محبت کے دل میں اگر
روشنی کی طرح جھلملا تے رہو
انجلی گپتا

جھوٹ ہے افواہ ہے تلوار سے ڈرتا ہوں میں
دوستوں بس اک تمہارے پیار سے ڈرتا ہوں میں
پردیپ اوستھی صادق

پروگرام کی نظامت کے فرائض سلیم بادل نے بحسن خوبی انجام دیے۔پروگرام کے آخر میں ضلع کوآرڈینیٹر پردیپ اوستھی نے تمام مہمانوں، تخلیق کاروں اور سامعین کا شکریہ ادا کیا۔

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"मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा शिवपुरी में "सिलसिला एवं तलाशे जौहर" के तहत डॉ. लखन लाल खरे को समर्पित स्मरण एवं रचना पाठ आयोजित"

मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग के तत्त्वावधान में ज़िला अदब गोशा, शिवपुरी के द्वारा सिलसिला एवं तलाशे जौहर के तहत शिवपुरी के प्रसिद्घ साहित्यकार डॉ. लखन लाल खरे को समर्पित स्मरण एवं रचना पाठ का आयोजन 20 सिंतबर 2025 को सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय, शिवपुरी में ज़िला समन्वयक प्रदीप अवस्थी के सहयोग से किया गया।

शिवपुरी में आयोजित सिलसिला एवं तलाशे जौहर के लिए मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की निदेशक ने अपने संदेश में संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला, उन्होंने कहा शिवपुरी में आयोजित “सिलसिला एवं तलाशे जौहर” संगोष्ठी का उद्देश्य डॉ. लखन लाल खरे जैसे बहुमुखी साहित्यकारों के योगदान का स्मरण कर नई पीढ़ी को उनके कार्यों से परिचित कराना, तलाशे जौहर प्रतियोगिता के माध्यम से नवोदित शायरों और रचनाकारों को मंच देकर उनकी प्रतिभा को निखारना तथा वरिष्ठ और नए रचनाकारों के बीच ग़ज़ल-पाठ, साहित्यिक संवाद और विचार-विमर्श के जरिए भाषा, साहित्य और संस्कृति की निरंतरता बनाए रखना है।
शिवपुरी ज़िले के समन्वयक प्रदीप अवस्थी ने बताया कि स्मरण एवं रचना पाठ दो सत्रों पर आधारित था। प्रथम सत्र में दोपहर 3:00 बजे तलाशे जौहर प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें ज़िले के नये रचनाकारों ने तात्कालिक लेखन प्रतियोगिता में भाग लिया। निर्णायक के रूप में गुना के वरिष्ठ शायर डॉ अशोक गोयल एवं शिवपुरी के उस्ताद शायर रफ़ीक़ इशरत ग्वालियरी मौजूद रहे जिन्होंने प्रतिभागियों शेर कहने के लिए दो तरही मिसरे दिये। दिये गये मिसरों पर नए रचनाकारों द्वारा कही गई ग़ज़लों पर एवं उनकी प्रस्तुति के आधार पर कल्पना सिनोरिया ने प्रथम,संजय शाक्य ने द्वित्तीय एवं शरद गोस्वामी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले तीनों विजेता रचनाकारों को उर्दू अकादमी द्वारा पुरस्कार राशि क्रमशः 3000/-, 2000/- और 1000/- एवं प्रमाण पत्र दिए जाएंगे।

दूसरे सत्र में शाम 5:00 बजे सिलसिला के तहत स्मरण एवं रचना पाठ का आयोजन हुआ जिसकी अध्यक्षता शिवपुरी के वरिष्ठ शायर इशरत ग्वालियरी ने की। वहीं मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रांतीय महामंत्री आशुतोष शर्मा तथा विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. अशोक गोयल, पुरुषोत्तम गौतम, प्रमोद भार्गव एवं स्थानीय वक्ता यूसुफ़ अहमद क़ुरैशी मंच उपस्थित रहे। इस सत्र के प्रारंभ में प्रसिद्घ साहित्यकार डॉ लखन लाल खरे के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर दोनों वक्ताओं ने चर्चा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
आशुतोष शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय लखनलाल खरे ने बुंदेली भाषा पर अदभुत कार्य किया है,रामचरितमानस के कतिपय प्रसंग हो या मदारी की आत्मकथा,या लोक कला नौटंकी पर आधारित उनकी पुस्तक हो सभी में उनकी विद्वता के दर्शन होते है।बज़्मे उर्दू के आयोजन हों या लेखक संघ के सभी में उनका सहयोग और उपस्थिति सदैव रहती भी थी,और प्रोत्साहन भी रहा करता था।ना जाने कितने ग़रीब बच्चों को शिक्षा की सुविधा मुहैया कराने वाले ,कितने ही विद्यार्थियों को पी एच डी कराने वाले स्वर्गीय खरे भले ही आज सशरीर हमारे बीच ना हो,पर उनके कार्य,उनकी पद्धति उनके विचार उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकों के माध्यम से हमारे साथ ही है।
वहीं यूसुफ़ अहमद क़ुरैशी ने कहा कि डॉ. लखन लाल खरे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उनकी गिनती शिवपुरी के महत्वपूर्ण साहित्यकारों में होती थी। वे एक मिलनसार, साहित्य प्रेमी और नए रचनाकारों के प्रोत्साहन, संरक्षण और हर तरह से मदद करने वाले नेक दिल इंसान थे और यह बात सर्वमान्य है कि जो व्यक्ति अच्छा इंसान नहीं होता वो अच्छा साहित्यकार भी नहीं हो सकता यानी अच्छा इंसान और अच्छा साहित्यकार होना एक दूसरे के पूरक हैं। वो शिवपुरी की कई साहित्यिक संस्थाओं से जुड़े हुए थे और उन्होंने शिवपुरी से दुनिया भर के लगभग 14 देशों तक जाने वाली डॉक्टर महेंद्र अग्रवाल की त्रैमासिक पत्रिका 'नई ग़ज़ल'के संपादक के तौर पर भी अपनी सेवाएं प्रदान कीं तथा उर्दू एवं हिंदी के और शायरों की रचनाओं के साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशन में महत्तवपूर्ण योगदान दिया। इसके अतिरिक्त उन्होंने भाषा एवं साहित्य से संबंधित शोध कार्य भी किया और आलोचक के रूप में भी पहचान बनाई।
रचना पाठ में जिन शायरों ने अपना कलाम पेश किया उनके नाम और अशआर निम्न हैं :

रफ़ीक़ इशरत ग्वालियरी
नाम हर शय पे तुम्हारा है हमारा क्या है
हमसे बच्चों को ये शिकवा है हमारा क्या है
अब तो हमसाये से कहने लगे बच्चे अपने
जब तलक बाप हमारा है, हमारा क्या है

डॉ. अशोक गोयल
ग़ज़ब न कीजिये ऐसा के आसमाँ टूटे ।
लक़ब ये शम्स का अब ,जुगनुओं पे जँचता नहीं।
दुआ है रब से सलामत रहें जहाँ में सब।
किसी का नाम भी इन पत्थरों पे जँचता नहीं।

मोहम्मद याक़ूब साबिर
दिल में तासीर मोहब्बत की उतर आने से
हां किसी शख़्स में बदलाव भी हो सकता है

मुबीन अहमद मुबीन
देखेगा मुबीन उस दम हर आदमी इज़्ज़त से
नफ़रत के अंधेरों में गर दीप जलाओगे

सतीश दीक्षित किंकर
खुदा ख़ुद को समझता है वही नादान है किंकर
हवेली जो चमकती थी वही सूनी पड़ी देखी

सुभाष पाठक ज़िया
है तमन्ना अगर उजालों की
तो हिफ़ाज़त करो चरागों की
भूल मत जाना तुम ज़मीं अपनी
बात करते हुए सितारों की

सौरभ तिवारी
कोई पर्ची भी मेरे नाम की नहीं निकली
दिले सकून के ,पैगाम की नहीं निकली
भरी पड़ी है हथेली मेरी , लकीरों से
कोई लकीर मेरे काम की नहीं निकली ।

सलीम बादल
परिंदे आबो दाना चाहते हैं
फ़क़त इक आशियाना चाहते हैं

उर्वशी शर्मा
किसी को देखने भर की तलबगारी कभी होगी
मुहब्बत में कहां सोचा था लाचारी कभी होगी

मुकेश शर्मा
माना कि किसी बात पर अनबन हो गई है उनसे,
मशवरा है मेरा बोलना बंद करना नहीं चाहिए।

अंजलि गुप्ता
दिल की दहलीज़ पर आते जाते रहो
प्रेम पुष्पों से आँगन सजाते रहो
हैं उजाले मुहब्बत के दिल में अगर
रौशनी की तरह झिलमिलाते रहो

प्रदीप अवस्थी सादिक़
झूठ है अपवाह है तलवार से डरता हूँ मैं
दोस्तों बस इक तुम्हारे प्यार से डरता हूँ

कार्यक्रम का संचालन सलीम बादल द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के अंत में ज़िला समन्वयक प्रदीप अवस्थी ने सभी अतिथियों, रचनाकारों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

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