Poonia Dairy Farm Jhansal

Poonia Dairy Farm Jhansal farmer frist

नागालैंड के Dr . सुरों  *भैंस पालन पर ज्ञान का आदान प्रदान * करने हमारे फार्म पर आए साथ मे  केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थ...
21/10/2025

नागालैंड के Dr . सुरों *भैंस पालन पर ज्ञान का आदान प्रदान * करने हमारे फार्म पर आए साथ मे केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान हिसार के प्रदान वैज्ञानिक डॉ अशोक जी बुरा आये,केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान हिसार का
बहुत बहुत आभार ओर धन्यवाद जिन्होंने वेबसाइट पर फ़ोटो ओर अन्य जानकारी अपलोड की

#खेत #किसान #खेतीबाड़ी #भैंस #गाँव #वन

18/10/2025

मिट्टी का pH क्या होता हैं जानिए:-
मिट्टी का pH मान 6.0 से 7.5 के बीच होने पर पौधों को पोषक तत्व आसानी से उपलब्ध होते हैं। लेकिन, जब यह मान इस सीमा से कम या ज्यादा होता है, तो फसलों और मिट्टी पर कई हानिकारक प्रभाव पड़ते हैंऔर खाद देने के बाद भी रिजल्ट नहीं मिलते।

A. मृदा में pH कम होने पर (अम्लीय मिट्टी हो जाती हैं)
जब मिट्टी का pH 6.0 से कम हो जाता है, तो यह अम्लीय हो जाती है। इसके मुख्य प्रभाव इस प्रकार हैं:
✅ पोषक तत्वों की कमी: अम्लीय मिट्टी में कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम और मोलिब्डेनम जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पौधों के लिए कम उपलब्ध हो जाते हैं। इससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और वे कमजोर हो जाते हैं।

✅ विषैले तत्वों की अधिकता: अम्लीय वातावरण में एल्यूमीनियम, मैंगनीज और आयरन जैसे तत्व अधिक घुलनशील हो जाते हैं, जिससे इनकी अधिकता पौधों के लिए विषाक्त (toxic) हो सकती है। यह पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचाता है और पोषक तत्वों के अवशोषण को बाधित करता है।
✅ सूक्ष्मजीवों की गतिविधि में कमी: मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव (microorganisms) जो जैविक पदार्थों को विघटित करते हैं और पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं, वे अम्लीय मिट्टी में कम सक्रिय हो जाते हैं।
✅ मिट्टी की संरचना खराब होना: अम्लीय मिट्टी अधिक चिकनी और कठोर हो सकती है, जिससे जल निकासी और वायु संचार में समस्या आती है।

B. मृदा में pH ज्यादा होने पर (क्षारीय मिट्टी हो जाती है)
जब मिट्टी का pH 7.5 से अधिक हो जाता है, तो यह क्षारीय हो जाती है। इसके मुख्य प्रभाव इस प्रकार हैं:

✅ पोषक तत्वों की अनुपलब्धता: क्षारीय मिट्टी में आयरन, जिंक, मैंगनीज, बोरॉन और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व अघुलनशील रूप में बंध जाते हैं। ये मिट्टी में मौजूद होते हैं, लेकिन पौधे इन्हें अवशोषित नहीं कर पाते हैं।
✅ खराब मिट्टी की संरचना: क्षारीय मिट्टी में सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है, जिससे मिट्टी की संरचना खराब हो जाती है। यह सख्त और अनुपयोगी हो जाती है, जिससे जड़ों का विकास रुक जाता है और जल निकासी भी प्रभावित होती है।
✅ लवणता में वृद्धि: अक्सर, क्षारीय मिट्टी में लवण (salts) भी अधिक होते हैं। यह पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचाता है और पानी के अवशोषण में बाधा डालता है, जिससे पौधों का विकास धीमा हो जाता है।
✅ पौधों की वृद्धि में कमी: पोषक तत्वों के असंतुलन और खराब मिट्टी की संरचना के कारण, पौधों की समग्र वृद्धि प्रभावित होती है। पत्तियां पीली पड़ सकती हैं, और फसल की उपज कम हो जाती है।

कृपया ध्यान दें: -
👉यदि मिट्टी का ph अधिक है तो आप
सल्फर 25kg, जिप्सम 100kg प्रयोग करें बुवाई के समय बेस्ट रिजल्ट मिलेंगे ph कम होगा
(कार्बन की मात्रा बढ़ाएं मिट्टी में)
कैल्शियम मैग्नीशियम पोटेशियम अधिक होने से भी ph बढ़ जाता है

“मृदा का पीएच 7.5 होना चाहिए”
अधिक रासायनिक खाद का उपयोग और खारे पानी से लगातार सिंचाई से मिट्टी का पीएच बढ़ता है।

👉यदि मिट्टी का ph कम है तो आप :-
4 से 5 तक तो चूने का प्रयोग करें
चूने का उपयोग करें
चूना क्यों: चूना, जिसे कृषि चूना भी कहा जाता है, मिट्टी की अम्लता को कम करता है और उसके पीएच स्तर को बढ़ाता है।
चूने का प्रकार: सामान्य कृषि चूना (कैल्शियम कार्बोनेट) या डोलोमाइटिक चूना (कैल्शियम और मैग्नीशियम का मिश्रण) इस्तेमाल किया जा सकता है।

लेकिन अधिकतर खेतों में मिट्टी का पीएच मान अधिक ही होता है कम करने के लिए -
💥संतुलित मात्रा में रासायनिक खाद का इस्तेमाल करें !
💥सल्फेट या जिप्सम इस्तेमाल करे।
💥फसल चक्र अपनाए।
💥कार्बनिक पदार्थ(ऑर्गेनिक मेटर) बढ़ाएं।
#किसान #खेत

14/10/2025

गेहूँ की नई अगेती किस्म डब्ल्यू एच 1270 से बढ़ेगा उत्पादन।

उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्र की सिंचित दशा में अगेती बिजाई के लिए।

जलवायु एवं क्षेत्र की उपयुक्तता?
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय , हिसार द्वारा विकसित गेहूं की किस्म डब्ल्यू एच 1270 को भारत के उत्तर पश्चिमी मैदानी भाग के लिए सिंचित क्षेत्र में अगेती बिजाई वाली खेती के लिए वर्ष 2021 में अधिसूचित किया गया है।

डब्ल्यू एच 1270 की उत्पादन विशेषताएं ( WH 1270 Wheat Variety Details in Hindi )

अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के गेहूं परीक्षणों में इस किस्म की औसत उपज 75.8 क्विंटल /है ० पाई गई है जो की एच डी 2967 एवं एच डी 3086 से क्रमश: 17. 8 % एवं 4.1 % अधिक है।
इस किस्म के द्वारा उत्पादन परीक्षणों में 91‌.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की रिकॉर्ड पैदावार क्षमता दर्ज की गई है।
रोग प्रतिरोधिता
यह किस्म पीला , भूरा व काला रतुआ की सभी प्रमुख रोगजनक प्रकारों के लिए प्रतिरोधक पाई गई है।

दानों की गुणवत्ता ?
डब्ल्यू एच 1270 के दानों में उच्च प्रोटीन मात्रा 12.4 % पाई जाती है।

डब्ल्यू एच 1270 किस्म की विशेषताएं

बाली निकलने की अवधि ( दिनों में) औसत – 100
पकने की अवधि (दिनों में) औसत- 156
पौधों की ऊंचाई ( सेंटीमीटर ) औसत – 100
1000 दानों का वजन ( ग्राम)औसत- 46
डब्ल्यू एच 1270 की उत्पादन पद्धति एवं क्षेत्र की उपयुक्तता?
यह किस्म उत्तर पश्चिमी भारत के मैदानी क्षेत्र के सिंचित दशा में अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त है।
बीज उपचार:-
गेहूं में खुली व पत्तों की कांगियारी रोग से बचाव के लिए कार्बोकसिन या कार्बेंडाजिम 2 ग्राम प्रति किलो या टेबुकोनाजोल 1 ग्राम प्रति किलो से बीजोपचार करें।
बिजाई का उचित समय:-
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर का प्रथम सप्ताह बिजाई का उचित समय है।
बीज दर और अंतराल:-
100 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर इस्तेमाल करके , पंक्तियों के बीच 20 सेंटीमीटर की दूरी के साथ बिजाई करनी चाहिए।
सिंचाई :-
गेहूं की फसल में सामान्यतः 5 से 6 सिंचाई की आवश्यकता होती है।
औसत उपज:-
75.8 क्विंटल प्रति हैक्टेयर।
उत्पादन क्षमता:-
91.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर।

13/10/2025

कितनी रिसर्च हुए है bread पर विदेश में
हम सब कितने पीछे है ,सभी साथियों इस vedio को पूरी देखे ,ओर लाइक,commant ,ओर शेयर करे
https://www.facebook.com/share/v/1BncjN1YgU/

09/10/2025
06/10/2025

हिसार कृषि विश्वविद्यालय की नई सरसो की किस्म

आरएच-1975: सरसों की नई किस्म
किसान भाइयों,हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हिसार) ने सरसों की एक नई किस्म बनाई है। ये ज्यादा फसल और तेल देती है, जिससे आपकी कमाई बढ़ सकती है।

इस किस्म से एक एकड़ में 11-12 क्विंटल #सरसों मिलेगी। अच्छी देखभाल से 14-15 क्विंटल तक हो सकता है।
इसमें 39.5% तेल की मात्रा है, जो खाना बनाने, कारखानों या पशु चारे के लिए बढ़िया है।
इस किस्म को आप हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, जम्मू और उत्तरी राजस्थान के खेतों में, जहाँ सिंचाई हो, बिजाई कर सकते है। सर्दियों (रबी) में 10-25 डिग्री तापमान में ये अच्छी फसल देती है।
हल्की या भारी मिट्टी में उगती है। फसल तैयार होने में 4.5-5 महीने लगते हैं। दाने मोटे और फलियों में ज्यादा बीज होते हैं।

बुवाई का समय: अक्टूबर-नवंबर में बोएँ।
सिंचाई: खेत में समय-समय पर पानी दें।
खेती की देखभाल: खेत अच्छे से तैयार करें। खाद और उर्वरक सही मात्रा में डालें। कीटों से बचाव करें।
सुझाव: स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें। #किसान #फसल #खेतीबाड़ी #खेत

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार स्थित सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण एवं शिक्षा संस्थान में ...
03/10/2025

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार
स्थित सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण एवं शिक्षा संस्थान में अक्तुबर महीने के दौरान विभिन्न प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे।

3 से 9 अक्तुबर 2025 तक मधुमक्खी पालन,
13 से 17 अक्तुबर 2025 तक डेयरी फार्मिंग,
15 से 17 अक्तुबर 2025 तक मशरूम उत्पादन तकनीक,
27 से 29 अक्तुबर 2025 तक बेकरी
और
29 से 31 अक्तुबर 2025 तक संरक्षित खेती पर प्रशिक्षण आयोजित किए जांएगे।
इस प्रशिक्षण में प्रदेश से किसी भी शैक्षणिक स्तर, आयु और वर्ग की इच्छुक महिला या पुरुष उम्मीदवार भाग ले सकते हैं।
यह प्रशिक्षण बिल्कुल नि:शुल्क है।
प्रशिक्षण में भाग लेने वाले उम्मीदवारों को विश्वविद्यालय की तरफ से प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा।
प्रशिक्षण के इच्छुक युवक और युवतियां पंजीकरण के लिए संस्थान में प्रशिक्षण शुरू होने वाले दिन ही सुबह 9:00 बजे पहुंच कर अपना पंजीकरण करवा कर प्रशिक्षण में भाग ले सकते हैं।

प्रशिक्षण का समय सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक रहेगा।
यह संस्थान विश्वविद्यालय के गेट नंबर 3 लूदास रोड पर स्थित है।

प्रशिक्षण पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान उम्मीदवार को एक फोटो और आधार कार्ड की फोटो कॉपी देनी होगी।

सरसो फसल की जानकारी  #खेतीबाड़ी    #खेत  #फसल  #किसान
02/10/2025

सरसो फसल की जानकारी
#खेतीबाड़ी #खेत #फसल #किसान

29/09/2025
27/09/2025

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