क्रियाकर्म "पितृ कर्म" पितरो की कृपा कैसे प्राप्त करे सम्पूर्ण जानकारी

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क्रियाकर्म "पितृ कर्म" पितरो की कृपा कैसे प्राप्त करे सम्पूर्ण जानकारी समस्त पत्रिका के दोषो का निवारण वास्त

22/09/2024

💐*श्राद्ध पक्ष*💐
पितृके प्रति समर्पण आस्था और पितृकृपा प्राप्ति का समय*
पित्रो के ऋण को कुछ कम करने का समय
*पित्रो द्वारा प्राप्त इस शरीर से पित्रो के लिए कुछ करने का समय*
*आए मा नर्मदा के उत्तरतट पर ओम्कारेश्वर तीर्थ क्षेत्र में स्थित बड़वाह में मां नर्मदा के किनारे पित्रो को समर्पित सर्वपितृ अमावस्या पर और पित्रो के लिए तर्पण व त्रिपिंडी श्राद्ध श्राद्ध ,तीर्थ श्राद्ध, पितृ दोष शांति,आदि करे*

*पितृकृपा* और *माँ नर्मदा के आशीर्वाद* से
इस आयोजन का चतुर्थ वर्ष है
जो प्रतिदिन *तर्पण* नही कर पाए विधिवद *पितृधुप*; *ब्राह्मणभोजन* आदि नही करा पाए है
प्रतिदिन का *श्राद्ध* नही कर पाए है या किन्ही भी कारणों से *श्राद्धपक्ष* में पितरों के लिए जो कर्म करना चाहिए
वो नही कर पाए है
तो आए हमारे साथ *सर्वपितृ अमावश्या* पर
इस आयोजन में और तर्पण पिंडदान आदि कर्म को
कम से कम सेवा राशि मे विधिवद पूर्ण करे
*अधिक जानकारी व तर्पणश्राद्ध आदि के लिए सम्पर्क करे* *7869474702*
अमावस्या पर तर्पण के लिए अपना स्थान सुनिश्चित करे
स्थान सीमित यजमानों के लिए ही है शीघ्रता से सम्पर्क करें
*ऑनलाइन पूजन की भी वेवस्ता है सीमित लोगो के लिए*

*पण्डित प्रितेश अत्रे*
*पितृ कर्मकर्ता निमाड़ क्षेत्र*
*7869474702*

20/09/2024
27/10/2023

खण्डग्रास चन्द्र ग्रहण
दिनांक 29/10/23 को चन्द्र ग्रहण रात्रि में है जो कि भारत में भी होगा
ग्रहण की छाया 28 /10/23 रात्री 11 32 मिनिट से होगी
ग्रहण का स्पर्श 29 /10/23रात्री 1 बजकर 05 मि
ग्रहण का मध्य रात्री 1 बजकर 44 मिनिट पर
और मोक्ष रात्री 2 23 मिनिट पर होगा
ग्रहण की छाया की समाप्ति
रात्री 3 56 पर समाप्त होगी

ग्रहण भारत में होने के कारण ग्रहण का सूतक दिन में 4 भेज 5 मिनिट से प्रारंभ होगा
अतः ग्रहण काल मे भगवान के नामका भजन करे

18/09/2023

क्षमा चाहता इतनी रात को मेसेज किया पर सुबह इसे जरूर पढ़ें

एक #पंडितजी को नदी में तर्पण करते देख एक #फकीर अपनी बाल्टी से पानी गिराकर जाप करने लगा कि..

"मेरी प्यासी गाय को पानी मिले।"

पंडितजी के पूछने पर उस फकीर ने कहा कि...

जब आपके चढाये जल और भोग आपके पुरखों को मिल जाते हैं तो मेरी गाय को भी मिल जाएगा.

इस पर पंडितजी बहुत लज्जित हुए।"

यह मनगढंत कहानी सुनाकर एक इंजीनियर मित्र जोर से ठठाकर हँसने लगे और मुझसे बोले कि -

"सब पाखण्ड है जी..!"

शायद मैं कुछ ज्यादा ही असहिष्णु हूँ...

इसीलिए, लोग मुझसे ऐसी बकवास करने से पहले ज्यादा सोच समझकर ही बोलते हैं क्योंकि, पहले मैं सामने वाली की पूरी बात सुन लेता हूँ... उसके जबाब उसे जबाब देता हूँ.

खैर... मैने कुछ कहा नहीं ....

बस, सामने मेज पर से 'कैलकुलेटर' उठाकर एक नंबर डायल किया...
और, अपने कान से लगा लिया.

बात न हो सकी... तो, उस इंजीनियर साहब से शिकायत की.

इस पर वे इंजीनियर साहब भड़क गए.

और, बोले- " ये क्या मज़ाक है...??? 'कैलकुलेटर' में मोबाइल का फंक्शन भला कैसे काम करेगा..???"

तब मैंने कहा.... तुमने सही कहा...
वही तो मैं भी कह रहा हूँ कि.... स्थूल शरीर छोड़ चुके लोगों के लिए बनी व्यवस्था जीवित प्राणियों पर कैसे काम करेगी ???

इस पर इंजीनियर साहब अपनी झेंप मिटाते हुए कहने लगे-
"ये सब पाखण्ड है , अगर ये सच है... तो, इसे सिद्ध करके दिखाइए"

इस पर मैने कहा.... ये सब छोड़िए
और, ये बताइए कि न्युक्लीअर पर न्युट्रान के बम्बारमेण्ट करने से क्या ऊर्जा निकलती है ?

वो बोले - " बिल्कुल ! इट्स कॉल्ड एटॉमिक एनर्जी।"

फिर, मैने उन्हें एक चॉक और पेपरवेट देकर कहा, अब आपके हाथ में बहुत सारे न्युक्लीयर्स भी हैं और न्युट्रांस भी...!

अब आप इसमें से एनर्जी निकाल के दिखाइए...!!

साहब समझ गए और तनिक लजा भी गए एवं बोले-
"जी , एक काम याद आ गया; बाद में बात करते हैं "

कहने का मतलब है कि..... यदि, हम किसी विषय/तथ्य को प्रत्यक्षतः सिद्ध नहीं कर सकते तो इसका अर्थ है कि हमारे पास समुचित ज्ञान, संसाधन वा अनुकूल परिस्थितियाँ नहीं है ,

इसका मतलब ये कतई नहीं कि वह तथ्य ही गलत है.

क्योंकि, सिद्धांत रूप से तो हवा में तो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन दोनों मौजूद है..
फिर , हवा से ही पानी क्यों नहीं बना लेते ???

अब आप हवा से पानी नहीं बना रहे हैं तो... इसका मतलब ये थोड़े ना घोषित कर दोगे कि हवा में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन ही नहीं है.

हमारे द्वारा श्रद्धा से किए गए सभी कर्म दान आदि आध्यात्मिक ऊर्जा के रूप में हमारे पितरों तक अवश्य पहुँचते हैं.

इसीलिए, व्यर्थ के कुतर्को मे फँसकर अपने धर्म व संस्कार के प्रति कुण्ठा न पालें...!

और हाँ...

जहाँ तक रह गई वैज्ञानिकता की बात तो....

क्या आपने किसी भी दिन पीपल और बरगद के पौधे लगाए हैं...या, किसी को लगाते हुए देखा है?
क्या फिर पीपल या बरगद के बीज मिलते हैं ?
इसका जवाब है नहीं....

ऐसा इसीलिए है क्योंकि... बरगद या पीपल की कलम जितनी चाहे उतनी रोपने की कोशिश करो परंतु वह नहीं लगेगी.

इसका कारण यह है कि प्रकृति ने यह दोनों उपयोगी वृक्षों को लगाने के लिए अलग ही व्यवस्था कर रखी है.

जब कौए इन दोनों वृक्षों के फल को खाते हैं तो उनके पेट में ही बीज की प्रोसेसिंग होती है और तब जाकर बीज उगने लायक होते हैं.

उसके पश्चात कौवे जहां-जहां बीट करते हैं, वहां वहां पर यह दोनों वृक्ष उगते हैं.

और... किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं है कि पीपल जगत का एकमात्र ऐसा वृक्ष है जो round-the-clock ऑक्सीजन (O2) देता है और वहीं बरगद के औषधि गुण अपरम्पार है.

साथ ही आप में से बहुत लोगों को यह मालूम ही होगा कि मादा कौआ भादो महीने में अंडा देती है और नवजात बच्चा पैदा होता है.

तो, इस नयी पीढ़ी के उपयोगी पक्षी को पौष्टिक और भरपूर आहार मिलना जरूरी है...

शायद, इसलिए ऋषि मुनियों ने कौवों के नवजात बच्चों के लिए हर छत पर श्राघ्द के रूप मे पौष्टिक आहार की व्यवस्था कर दी होगी.

जिससे कि कौवों की नई जनरेशन का पालन पोषण हो जाये......

इसीलिए.... श्राघ्द का तर्पण करना न सिर्फ हमारी आस्था का विषय है बल्कि यह प्रकृति के रक्षण के लिए नितांत आवश्यक है.

साथ ही... जब आप पीपल के पेड़ को देखोगे तो अपने पूर्वज तो याद आएंगे ही क्योंकि उन्होंने श्राद्ध दिया था इसीलिए यह दोनों उपयोगी पेड़ हम देख रहे हैं.

अतः.... सनातन धर्म और उसकी परंपराओं पे उंगली उठाने वालों से इतना ही कहना है कि....
जब दुनिया में तुम्हारे ईसा-मूसा-भूसा आदि का नामोनिशान नहीं था...

उस समय भी हमारे ऋषि मुनियों को मालूम था कि धरती गोल है और हमारे सौरमंडल में 9 ग्रह हैं.

साथ ही... हमें ये भी पता था कि किस बीमारी का इलाज क्या है...
कौन सी चीज खाने लायक है और कौन सी नहीं...?

देश की आजादी के बाद 70 वर्षों में इन्हीं बातों को अंधविश्वास और पाखंड साबित करने का काम हुआ है। अब धीरे-धीरे सनातन संस्कृति पुनर्जीवित हो रही है ।
जय सनातन धर्म
🙏 मात श्री नर्मदे हर 🙏

,,,,,,,,,,तर्पण 2,,,,,,,,पिछली पोस्ट को  अवश्य पढ़ेंतर्पण के माध्यम से  देव तर्पण ऋषि तर्पण दिव्य मनुष्य तर्पण तत्पश्चात ...
18/09/2023

,,,,,,,,,,तर्पण 2,,,,,,,,
पिछली पोस्ट को अवश्य पढ़ें
तर्पण के माध्यम से
देव तर्पण ऋषि तर्पण दिव्य मनुष्य तर्पण तत्पश्चात चतुर्दस यम तर्पण इसके पश्चात पिता पितामह पर परपितामह
माता-पितामही परपितामही आदि को जलाअंजलि दी जाती है
*उसके पश्चात द्वितीय गोत्र नाना जी का*
नाना नानी परनाना परनानी आदि

उसके बाद हमारे बंधु बांधव, मामा ,मौसी ,गुरु ,मित्र ,ससुर सखा वह हमारे घर के नौकर को
जलाजलि दी जाती है
क्योंकि यह सभी लोग हमसे प्रेम रखते हैं
हमसे कुछ पाने की इच्छा आस रखते हैं

इसी प्रकार हमारे साथ कुल में सात जन्म में जो हमारे बंधु बांधव यहां वहां है उन्हीं सब को जला अंजलि भीष्म पितामह को जला अंजलि व सूर्य भगवान को अर्घ देकर के प्रतिदिन तर्पण किया जाता है

*शास्त्र के लेख के अनुशार*
कहा गया है कि पितृपक्ष में जिनके सगे सम्बधी द्वारा उनका तर्पण श्राद्ध नही होता तो
वहां से पितृ बिना श्राद्ध जल अन्न के लौटते है
तो पितृ सगे संबधियों का बाध्य हो कर रक्त चूसने लगते है

अतः तर्पण व श्राद्ध प्रतिदिन करना चाहिए आप लोगों से नहीं होता इसीलिए किसी ब्राह्मण से करवाना चाहिए
इसीलिए
मेरे द्वारा विगत कई वर्षों से एक पर्चा आप लोगों को वितरित किया जाता है उस पर आप मुझे आपने पितरों के नाम आदि लिख करके पहुंचा दें
मेरे द्वारा पूर्णिमा तिथि से अमावस्या तिथि तक आप सभी के पितरों के निमित्त नित्य तर्पण होता है
इस बीच किसी भी एक दिवस आप नर्मदा तट पर आकर मुझसे तर्पण करवा सकते हैं
प्रतिदिन तर्पण सेवा राशी 2100 रु

तर्पण करवाने से लाभ
पितरो की कृपा उनके होने का एहसास प्राप्त होता है
पितृ ऋण चुकता रहता है
तरक्की के मार्ग खुलते हैं
पितरों की कृपा बनी रहती है
ग्रह कलेश उपद्रव कम हो जाता है
पित्र दोष में शांति मिलती है
पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है
धन-धान्य में वृद्धि होती है
*अधिक जानकारी व पितृ तर्पण व अमावस्या तिथि पर नर्मदा तट पर त्रिपिंडी श्राद्ध पितृ तर्पण तीर्थ श्राद्ध आदि के लिए आप मुझसे संपर्क करें*

*पंडित प्रितेश अत्रे*
(पित्रकर्म कर्ता निमाड़ क्षेत्र)
*समस्त पित्रकर्मके लिए संपर्क करें 7869474702*

,,,,,,,,तर्पण,,,,,,*श्राद्ध पक्ष में होने वाला विशेष कर्म है तर्पण * *नित्य तर्पण* यूं तो प्रत्येक मनुष्य को पितरों के ल...
18/09/2023

,,,,,,,,तर्पण,,,,,,
*श्राद्ध पक्ष में होने वाला विशेष कर्म है तर्पण *

*नित्य तर्पण*
यूं तो प्रत्येक मनुष्य को पितरों के लिए प्रतिदिन
*तर्पण* करना चाहिए
परंतु समय अभाव में हम लोगो से भी नित्य *तर्पण* नहीं होता
तो आम लोगों की बात ही क्या
लेकिन यह *तर्पण क्या है*
*मेरी दृष्टि में हमारे मनके भावों को श्रद्धा और प्रेम से अर्पण करना ही तर्पण है*

प्रत्येक व्यक्ति से *श्राद्ध पक्ष* में में प्रतिदिन तर्पण नहीं हो पाता
*श्राद्ध पक्ष ही पूरे वर्ष में ऐसा पक्ष है* जहां किसी ना किसी पितृ का आगमन हमारे घर प्रतिदिन होता है!

*और श्राद्ध में दिए गए श्रद्धा से भाव से धूप अन्नदान व तर्पण के जल जव तिल शहद दूध आदी के माध्यम से पितृ भोजन ग्रहण कर हमे आशीर्वाद प्रदान करते है*

*श्राद्ध में तर्पण अवश्य होना चाहिए*
तर्पण का भाव मेरे अनुसार तिलांजलि के माध्यम से हमारे मन के भावों को पितरों को श्रद्धा पूर्वक अर्पण करना ही तर्पण है
*द्रव्य सामग्री आदी का अभाव हो कोई बात नही परन्तु हमारे मन के भाव का अभाव नही होना चाहिए*

*इसलिए विगत कई वर्षों से 16 दिनों के तर्पण का यह कार्य मेरे द्वारा किया जाता रहा है*

आगे की जानकारी अगली पोस्ट में पढ़े

अधिक जानकारी व तर्पण अमावश्या पर तीर्थ श्राद्ध के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध करवाने के लिए संपर्क करे
पण्डित प्रीतम अत्रे
7869474702
💐💐💐💐💐💐💐

इस पोस्ट को समझने के लिए पिछले दोनो पोस्ट पढ़े  श्राध्द का समयश्राध्द की प्रक्रिया पूरी करने के समय को शास्त्रों में कुत...
15/09/2023

इस पोस्ट को समझने के लिए पिछले दोनो पोस्ट पढ़े
श्राध्द का समय
श्राध्द की प्रक्रिया पूरी करने के समय को शास्त्रों में कुतकाल कहा गया है। इसकी अवधि प्रायः दिन के 1 बजे से अपरान्ह 4 बजे तक की होती है। श्राध्द कर्म करने के लिए सर्वप्रथम अपने घर के द्वार को धोकर और लीपकर शुरु करना चाहिये। फिर ब्राह्मण को आमंत्रित कर उसकेअंदर अपने पुरखों का भाव स्मरण कर उसको सम्मानपूर्वक भोजन कराए कराएँ।
श्राध्द के प्रारम्भ में और अंत में तीन-तीन बार निम्न श्लोक का उच्चारण करें।
देवताभ्य पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वाहायै स्यधायै नित्मेव नमो नमः।।
श्राध्द के प्रकार
श्राध्द तीन प्रकार के होते हैं। नारायण बलि, नागबलि एवं त्रिपिंडी। पितरो को प्रसन्न करने के लिए किए जाने वाले श्राध्द को पितृयज्ञ कहा गया है।
और्ध्वदैहिक- यह मृतकों का श्राध्द है। जो व्याक्ति जिस तिथि को देह त्याग देता हैं, उस तिथि को हर वर्ष यह श्राध्द किया जाता है। इसी महालय श्राध्‍द को पार्वण श्राध्द भी कहा जाता है । तीर्थस्थल में किया जाने वाला श्राध्द तीर्थश्राध्द, कहलाता है। त्रिपिंडी श्राध्द को एकोदिष्ट श्राध्दा भी कहा जाता है। त्रिपिंडी श्राध्द - त्रिपिंडी काम्‍य श्राध्द है। लगातार तीन वर्ष तक जिनका श्राध्द न किया गया हो, उनको प्रेतत्‍व प्राप्त होता है। अमावस्या पितरों की तिथि है। इस दिन त्रिपिंडी श्राध्द किया जाता है।


समस्त पितृ दोष निवारक पूजन गरुड़पुराण दशा एकादशाह नारयण बली नागबली द्वादशा(बारवा)त्रयोदशा (मंगल श्राद्ध)पगड़ी बरसी वार्षिक श्राद्ध(6 मासी 12 मासी) तर्पण श्राद्ध मिलान(महालय) पावर्ण श्राद्ध तीर्थ श्राद्ध गयाश्राद्ध त्रिपिंडी श्राद्ध एकोदिष्ट श्राद्ध उदक शांति कलशर्प शांति मूल शांति आदी समस्त कार्यकर्म व क्रियाकर्म वेदोक्त शास्त्रोक्त रीति से सम्पन्न किये जाते है इन समस्त कर्म एवम इनके विधान की जानकारी के लिए भी आप संपर्क कर सकते है

पण्डित प्रितेश अत्रे
पितृकर्म कर्ता निमाड़क्षेत्र बड़वाह ,मोरटक्का,ओम्कारेश्वर
मो 7869474702,8959924662

इस पोस्ट को पढ़ने से पहले पिछली पोस्ट पढ़ेजिसकी आर्थिक स्थिति कमजोर है, वह चारा और घास लाकर गौ को खिला सकता है। यदि किसी...
15/09/2023

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जिसकी आर्थिक स्थिति कमजोर है, वह चारा और घास लाकर गौ को खिला सकता है। यदि किसी के लिए यह भी संभव न हो, तो वह केवल आठ तिलों से जलांजलि दे दें। जिस व्यक्ति के लिए यह भी मुश्किल हो, तो वे सूर्यनारायण के सामने हाथ उठाकर निवेदन करे- 'मेरे पास श्राद्ध करने के लिए न तो पैसा है और न ही कोई सामग्री। मैं आपको साक्षी मानकर अपने पितरों को नमस्कार करता हूँ , वे मेरी इस प्रार्थना से ही तृप्त हो जाएँ।'
श्राध्द की शास्त्रीय मान्यता
मार्कण्डेय पुराण में कहा गया है कि
पितृनिःश्वास विध्वस्तं सप्तजन्मार्जित धनम्।
त्रिजन्म प्रभवं देवो निःश्वासो हन्त्यसंशयम्।।
यतस्ते विमुखायान्ति निःस्वस्य गृहमेधिनः।
तस्मादिष्टश्च पूर्तश्च धर्मो दावपिनश्यतः।।
पितरों के असंतुष्ट हो जाने से सात जन्मों का पुण्य नष्ट हो जाता है और देवताओं के रुष्ट हो जाने से तीन जन्मों का पुण्य नष्ट हो जाता है। देवता और पितर जिससे रुष्ट हो जाते हैं उसके यज्ञ और पूर्त दोनों धर्मो का नाश हो जाता है।
अपि स्यात्सकुलेस्माकं यो नो दघाद्ज्जलांजलिम्।
नदीषु बहुतोयाषु शीतलाषु विशेषतः।
अपि स्यात्सकुलेस्माकं यः श्राध्दनित्यमाचरेत्।।
पयोमूलफलैर्भक्ष्यैस्तिल तोयेन वा पुनः।।
पितृगण कहते है कि क्या हमारे वंश में कोई ऐसा भाग्यशाली जन्म लेगा, जो शीतल जल वाली नदी के जल से हमें जलांजलि देकर तथा दुग्ध, मूल, फल, खाघान सहित तिल मिश्रित जल से श्राध्द कर्म करेगा।
याज्ञवल्क्यस्मृति में श्राद्ध-कर्म को लेकर कहा गया है कि श्राद्धकर्ता पितरों के आशीर्वाद से धन-धान्य, सुख-समृद्धि, संतान और स्वर्ग प्राप्त करता है। मत्स्यपुराण और वायुपुराण में श्राद्ध के विधान और इसके पर विस्तार से चर्चा की गई है। विष्णुधर्मोत्तरपुराण में पितृगण को देवताओं से भी अधिक दयालु और कृपालु बताया गया है। पितृपक्ष में श्राद्ध और तर्पण पाकर वे वर्ष भर तृप्त बने रहते है। जिस घर में पूर्वजों का श्राद्ध होता है, वह घर पितरों द्वारा सदैव सुरक्षित रहता है। शास्त्रों के अनुसार, पितृपक्ष में श्राद्ध न किए जाने पर पितर अतृप्त होकर कुपित हो जाते है, जिसके फलस्वरूप व्यक्ति को अनेक दुख और कष्ट भोगना पड़ता है।
धर्मग्रंथों में कहा गया है कि मृतक के लिए किए गए श्राद्ध का सूक्ष्मांश उस तक अवश्य पहुँचता है, चाहे वह किसी भी लोक में, किसी भी योनि में क्यों न हों। गरुड़पुराण में परलोक का जितना विस्तृत और सूक्ष्म वर्णन है, उतना विश्व के किसी अन्य ग्रंथ में नहीं है। 'अथर्ववेद' और 'शतपथ ब्राह्मण' में भी पितृलोक का स्पष्ट उल्लेख है।
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पण्डित प्रितेश अत्रे
पितृकर्म कर्ता निमाड़क्षेत्र बड़वाह ,मोरटक्का,ओम्कारेश्वर
मो 7869474702,8959924662

.श्रध्दा का पर्व है श्राध्द पक्षहिंदू पंचांग (कैलेंडर) में आश्विन मास के संपूर्ण कृष्णपक्ष में पितरों को संतुष्ट करने के...
15/09/2023

.श्रध्दा का पर्व है श्राध्द पक्ष

हिंदू पंचांग (कैलेंडर) में आश्विन मास के संपूर्ण कृष्णपक्ष में पितरों को संतुष्ट करने के लिए समर्पित किया गया है। इसी कारण इसे 'पितृपक्ष' कहा जाता है। भारतीय काल-गणना के अनुसार, इस समय सूर्य कन्या राशि में होता है। इसलिए 'कन्या' राशि में सूर्य की स्थिति में पड़ने वाले पितृपक्ष को जनसाधारण में 'कनागत' के नाम से भी जाना जाता है।
शास्त्रों में आश्विन मास कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक की सब तिथियाँ श्राध्द पक्ष में शामिल की गई हैं। कभी-कभी किसी एक तिथि का क्षय होने से दो श्राध्द एक दिन भी आ जाते हैं। आनादिकाल में आश्विन मास के श्राध्द पक्ष में भाद्रपद मास की पूर्णिमा का दिन श्राध्द शामिल नहीं था। चूंकि माह के एक पक्ष में अमावस्या व दूसरे पक्ष में पूर्णिमाआती है। इसलिए आश्विन मास कृष्ण पक्ष के पहले की भाद्रपद की पूर्णिमा को श्राध्द पक्ष में जोड़ा गया है। इसके पीछे भावना यह है कि जो जिन पूर्वजों का निधन पूर्णिमा को हुआ है। उनका श्राध्द कब किया जाए। सर्वपितृ अमावस्या में सभी पितरों के श्राध्द की व्यवस्था है। इसलिए भाद्रपद मास की पूर्णिमा को भी श्राध्द पक्ष में शामिल कर लिया गया।
शास्त्रों में पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मिक तृप्ति के लिए श्राद्ध और तर्पण की बात कही गई है। पितरों की संतुष्टि के लिए उनके निमित्त श्रद्धापूर्वक किया जाने वाला कार्य 'श्राद्ध' कहलाता है। श्राद्ध और तर्पण वंशज द्वारा पूर्वजों की दी गई श्रद्धांजलि है। हमें किसी भी स्थिति में अपने इस आध्यात्मिक कर्तव्य से विमुख नहीं होना चाहिए। पितृपक्ष को हमें पूर्वजों के स्मृति-पर्व के रूप में मनाना चाहिए। पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का इससे अच्छा और कोई अवसर नहीं हो सकता। यह हमारा दायित्व भी है और धर्म भी। विष्णुपुराण में कहा गया है कि श्राद्ध और तर्पण से तृप्त होकर पितृगण श्राद्ध करने वालों की सभी कामनाओं को पूर्ण कर देते है। व्यक्ति को अपनी साम‌र्थ्य के अनुसार श्राद्ध-कर्म अवश्य करना चाहिए। यदि कोई आदमी ब्राह्मणों को भोजन कराने में असमर्थ है, तो वह यथाशक्ति कच्चा अनाज, सब्जी, फल आदि दे सकता है।
शास्त्रों के अनुसार श्राध्द का अधिकार केवल पुत्र को ही हो सकता हैं। पुत्र की कामना के पीछे यह परंपरा भी एक वजह रही है। पुत्र के अभाव में विधवा स्त्री को अपने पति का श्राध्द करने का अधिकार दिया गया है। पुत्री के पुत्र यानी नाती को भी श्राध्द करने योग्य माना गया है। व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए गोत्र भाई या किसी भी सगोत्री को श्राध्द का अधिकार दिया गया है। श्राध्द करने की प्रथा पूर्वजों की पूजा का ही एक विशिष्ट रूप है और दिवंगत प्रियजनों की आत्मा की शांति हेतु ही श्राध्द व तर्पण किया जाता है।आगे की बात। अगली पोस्ट में

समस्त पितृ दोष निवारक पूजन गरुड़पुराण दशा एकादशाह नारयण बली नागबली द्वादशा(बारवा)त्रयोदशा (मंगल श्राद्ध)पगड़ी बरसी वार्षिक श्राद्ध(6 मासी 12 मासी) तर्पण श्राद्ध मिलान(महालय) पावर्ण श्राद्ध तीर्थ श्राद्ध गयाश्राद्ध त्रिपिंडी श्राद्ध एकोदिष्ट श्राद्ध उदक शांति कलशर्प शांति मूल शांति आदी समस्त कार्यकर्म व क्रियाकर्म वेदोक्त शास्त्रोक्त रीति से सम्पन्न किये जाते है समस्त जानकारी व श्राद्ध विधि जानने के लिए भी आप संपर्क कर सकते है

पण्डित प्रितेश अत्रे
पितृ कर्म कर्ता निमाड़क्षेत्र बड़वाह ,मोरटक्का,ओम्कारेश्वर
मो 7869474702,8959924662

26/08/2023

💐 *जय श्री कृष्णा* 💐
*कैसे है आप सभी*
*शुद्ध श्रावण शुक्ल पक्ष एकादशी पवित्रा एकादशी* की जानकारी आप सभी को दे रहा हु
दिनांक *27 अगस्त 2023* को एकादशी का व्रत है
28 अगस्त को पारण किया जाएगा
इस एकादशी का *फ़रियाल सिघाड़ा सिगोड़ा है*
*समस्त व्रतों की तारीख ,जानकारी व अनुष्ठानों की जानकारी के लिए हमारे ग्रुप में जुड़े या मुझे मेरे नम्बर पर सम्पर्क करें*

*पण्डित प्रीतेश अत्रे*
*श्रीक्षेत्र ओमकारेश्वर*
*मो 7869474702*
*निवेदन जानकारी को अधिक से अधिक शेयर कर पुण्य लाभ लेवे अन्य लोगो को भी जोड़े*

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