ग़ज़ल संध्या/ Ghazal sandhya

ग़ज़ल संध्या/ Ghazal sandhya गीतों ,गज़लों ,कविताओं और नज़्मो का विहं?

03/10/2025

कभी मुझ को साथ लेकर, कभी मेरे साथ चल के
वो बदल गये अचानक, मेरी ज़िन्दगी बदल के

हुए जिस पे मेहरबाँ, तुम कोई ख़ुशनसीब होगा
मेरी हसरतें तो निकलीं, मेरे आँसूओं में ढल के

तेरी ज़ुल्फ़-ओ-रुख़ के, क़ुर्बाँ दिल-ए-ज़ार ढूँढता है
वही चम्पई उजाले, वही सुरमई धुंधलके

कोई फूल बन गया है, कोई चाँद कोई तारा
जो चिराग़ बुझ गये हैं, तेरी अंजुमन में जल के

मेरे दोस्तो ख़ुदारा, मेरे साथ तुम भी ढूँढो
वो यहीं कहीं छुपे हैं, मेरे ग़म का रुख़ बदल के

तेरी बेझिझक हँसी से, न किसी का दिल हो मैला
ये नगर है आईनों का, यहाँ साँस ले सम्भल के

#दानिश
#ग़ज़ल
#गीत
#कविता
#ग़ज़लसंध्या

16/09/2025

क़ीमत बड़ी चुकाई ज़रा से उधार की
नथनी के बदले नथ पे नज़र थी सुनार की

अब क्या मिसाल दीजिए क़िस्मत की मार की
घर में कुँआरी रह गई बेटी कहार की

सीने को छोड़ो पीठ पे बांधा करो कवच
इस दौर की लड़ाई है पीछे से वार की

मुर्दे पे ख़ाक डाल के हाथों को झाड़ के
हंस हंस के बातें होने लगी कारोबार की

ये ज़िंदगी सुनार है और मौत है लोहार
लाज़िम है सौ सुनार कि और इक लोहार की

थमते ही रक़्स चाक का थमती है ज़िन्दगी
मिट्टी में मिट्टी होती है मिट्टी कुम्हार की

पत्थर दुबारा आदमी होते ही रो पड़ा
हद हो गई थी सब्र की और इंतज़ार की

अय रहनुमा ख़ुदा न बनो आदमी रहो
इतनी सी इल्तिजा है ‘विजय’ ख़ाकसार की

विजय तिवारी ‘

22/08/2025

"क्यों है ??

दिल का आलम ये उदास क्यों है ??
हर नज़र में हिज्रास क्यों है ??
क्यों है ?? क्यों है ??

तेरी चाहत में बसर हैं सब लम्हे,
फिर भी दिल में इतना प्यास क्यों है ??
क्यों है ?? क्यों है ??

तेरे नक़्शे से रोशन है रूह मेरी,
फिर भी आंखे उदास क्यों है ??
क्यों है ?? क्यों है ??

तेरी ख़ुशबू से बसा है ये दिलबर,
फिर जब जज़्बात बिखरे आस क्यों है ??
क्यों है ?? क्यों है ??

“पियूष” पूछे मोहब्बत की रह से,
हर जवाब में सवाल क्यों है ??
क्यों है ?? क्यों है ??

20/08/2025

अगर तुम्हें नींद नहीं आ रही
तो मत करो कुछ ऐसा
कि जो किसी तरह सोए हैं उनकी नींद हराम हो जाए

हो सके तो बनो पहरुए
दुःस्वप्नों से बचाने के लिए उन्हें
गाओ कुछ शान्त मद्धिम
नींद और पके उनकी जिससे

सोए हुए बच्चे तो नन्हें फरिश्ते ही होते हैं
और सोई स्त्रियों के चेहरों पर
हम देख ही सकते हैं थके संगीत का विश्राम
और थोड़ा अधिक आदमी होकर देखेंगे तो
नहीं दिखेगा सोये दुश्मन के चेहरे पर भी
दुश्मनी का कोई निशान

अगर नींद नहीं आ रही हो तो
हँसो थोड़ा , झाँको शब्दों के भीतर
ख़ून की जाँच करो अपने
कहीं ठंडा तो नहीं हुआ

चंद्रकांत देवताले

10/07/2025

एक रात एक बात लिखूंगा

खुद को दाग, तुझे साफ लिखूंगा

हक़ीक़त में तुम कभी मिलोगी नहीं

एक किताब में अपनी मुलाकात लिखूंगा

05/07/2025
14/05/2025

फिर नहीं बसते वो दिल जो एक बार उजड़ जाते हैं ग़ालिब

कब्र को कितना भी सजाओ कोई लौट कर नहीं आता

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