22/11/2025
आयुर्वेद की बढ़ती लोकप्रियता आज वैश्विक क्षितिज पर - डॉ पीके प्रजापति
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नई दिल्ली: विश्व आयुर्वेद मिशन द्वारा कॉन्स्टीटयूसन क्लब, नई दिल्ली में “इन्टीग्रेटिंग आयुर्वेद विद मॉडर्न टेक्नोलॉजी, साइंटिफिक वेलीडेसन एण्ड एक्सपेन्डेड पब्लिक हेल्थ इनीसिएटिव्स” विषय पर प्रवेक कल्प के सौजन्य से एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया । जिसकी अध्यक्षता विश्व आयुर्वेद मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ जी एस तोमर ने की । अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के डायरेक्टर डॉ पी के प्रजापति मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए एवं आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ अशोक कुमार वार्ष्णेय व नेशनल प्लांट मेडिसिन बोर्ड के सीईओ डॉ महेश दधीच एवं विजिटिंग फ़ैकल्टी, हिन्दू यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका डॉ अखिलेश शर्मा, अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे । कार्यक्रम का प्रारम्भ उपस्थिति अतिथियों ने दीप प्रज्वलन एवं धन्वन्तरि वंदना के साथ किया । इसके बाद प्रवेक कल्प के डायरेक्टर करन अग्रवाल एवं विश्व आयुर्वेद मिशन के कोषाध्यक्ष डॉ लाल सिंह कुशवाह ने मंचस्थ अतिथियों को पुष्पगुच्छ, अंगवस्स्त्रम् एवं स्मृति चिह्न प्रदान करके किया । मिशन के राष्ट्रीय सह सचिव डॉ अवनीश पाण्डेय ने वाचिक स्वागत एवं अभिनंदन किया । मिशन के राष्ट्रीय महासचिव डॉ डी पी आर्य ने विश्व आयुर्वेद मिशन का परिचय दिया । इसके बाद विश्व आयुर्वेद मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ जी एस तोमर ने विषय प्रवर्तन करते हुए वर्तमान परिदृश्य में आयुर्वेद की दशा एवं दिशा को रेखांकित किया एवं वर्तमान संभाषा के औचित्य पर प्रकाश डाला । केलीफोर्निया कॉलेज ऑफ आयुर्वेद, हिन्दू यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका के विज़िटिंग फ़ैकल्टी एवं बोर्ड मैम्बर डॉ अखिलेश शर्मा ने पाश्चात्य देशों में आयुर्वेद की बढ़ती हुई लोकप्रियता के सम्बन्ध में अवगत कराया । विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में डॉ महेश दधीच ने पर्यावरण संरक्षण और औषधीय पौधों के महत्व पर प्रकाश डाला, जिसमें कई अधिक ऑक्सीजन उत्पन्न करने वाले वृक्षों और उनके चिकित्सीय गुणों को प्रदर्शित किया गया। प्रमुख प्रजातियों में आम, आंवला,गुग्गुल, काली मिर्च, हल्दी, सहजन, तिल और गिलोय शामिल हैं।
इसी श्रृंखला में अपने विचार व्यक्त करते हुए आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ अशोक कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि आयुर्वेद की बढ़ती हुई लोकप्रियता के चलते इसे वर्तमान वैज्ञानिक मापदंडों पर प्रमाणित कर लोक ग्राह्य बनाना होगा । कोई भी विधा तब तक लोकप्रिय नहीं होती जब तक समाज के आख़िरी छोर पर खड़े व्यक्ति तक इसका लाभ न पहुँचे । आरोग्य भारती देश का सबसे बड़ा सेवा संगठन है । यह अपने विविध प्रकल्पों के माध्यम से आयुर्वेदीय जीवनशैली एवं अन्य स्वस्थ रहने के उपायों को देश के कोने कोने तक पहुँचा रही है ।
मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में डॉ पी के प्रजापति ने आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा इस दिशा में किए जा रहे विभिन्न कार्यों की जानकारी साझा की । उन्होंने बताया कि आयुर्वेद को साक्ष्य आधारित सिद्ध करने के प्रमाण मे आज पब्लिक डोमेन में 90 हज़ार से अधिक शोध पत्र उपलब्ध हैं । उन्होंने मिशन के कार्यों की सराहना की एवं इस सफलतम आयोजन हेतु आयोजकों को बधाई दी ।इसके उपरांत विश्व आयुर्वेद मिशन द्वारा आयुर्वेद के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान के लिए पूर्व सलाहकार आयुर्वेद डॉ डी सी कटोच, एनडीएमसी के पूर्व सीएमओ डॉ आर पी शर्मा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड एवं चौधरी ब्रह्मप्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान के पंचकर्म विभागाध्यक्ष डॉ अरुण गुप्ता एवं सीसीआरएएस की पूर्व डायरेक्टर, डॉ भारती गुप्ता को सर्विस एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया गया । सेमिनार के वैज्ञानिक सत्र में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान से डॉ रमाकांत यादव, डॉ शालिनी राय, डॉ अंकुर त्रिपाठी, डॉ शिवानी घिल्डियाल, चौधरी ब्रह्मप्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान से डॉ अरुण गुप्ता, सीसीआरएएस से डॉ स्वाती शर्मा, दिल्ली सरकार के आयुष निदेशालय में सीएमओ आयुर्वेद डॉ नीरज त्रिपाठी एवं वरिष्ठ आयुर्वेद कन्सल्टेंट डॉ प्रीति छाबड़ा ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए । कार्यक्रम में एक सौ पचास से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया ।