10/01/2026
*जिला न्यायपालिका के एक और कर्मचारी की आत्महत्या कुछ दिन की चर्चा फिर अगली आत्महत्या तक विराम*
ऐसी सूचनाएं भीतर से झकझोर देती हैं, न जाने जिम्मेदार कैसे सो पाते होंगे, ऐसी सूचना कोई सामान्य संदेश नहीं है यह भारतीय न्यायपालिका के भीतर के माहौल को दर्शाने के लिए एक गहन संकेत है, जिसे हर बार उपेक्षित ही किया जाता है।
अहलमद, पेशकार
जो कचहरी से वाकिफ है वो जानते है इन पदनाम को, कभी इनकी व्यथा किसी ने जानने की कोशिश नहीं की, मुकदमों का राष्ट्रीय बोझ जिनके कंधों पर अनवरत लदा है ये पदनाम उन्हीं जीवों का है, हां हम यही हैं।
हर जिला अदालत में काम सुनामी गति से बढ़ रहा, लेकिन स्टाफ स्ट्रक्चरिंग वही अंग्रेजों वाली पदनाम से ही अंदाजा लगा सकते है नाजिर, अहलमद, मुंसरिम, पेशकार गजब है
जब भी देश में मुकदमों की संख्या और तारीख पर तारीख की बात हुई तो सारा विकास गया जजवाद के हिस्से में
साहब के वेतन, भत्तों, आवासीय सुविधा, और न जाने क्या क्या गजब तरीके से बढ़ गए, हमे इससे भी गुरेज नहीं हम स्वागत करते है इसका, यह जज साहब का अधिकार है क्योंकि बहुत अलग माहौल है कोर्ट के काम का
लेकिन व्यवस्था कर्मचारी को झांकना तक पसंद नहीं करती, कोर्ट कर्मचारी जज साहब से घंटे भर पहले आता है और दो घंटे बाद जाता है
असल स्थिति है कि जितना स्टाफ भर्ती किया सरकार ने उससे ज्यादा प्राइवेट लगा कर काम हो पा रहा है
कर्मचारियों के प्रोन्नति के लगभग आधे पद विभिन्न प्रदेशों में खाली है, एक इंसान कितना काम कर सकेगा यह जांच न्यायपालिका के कर्मचारी के लिए कभी की ही नहीं गई, न्यायपालिका में कंप्यूटरीकरण और जानलेवा हुआ, जो व्यवस्था आई उससे कोई पंजिका नहीं बनती, कोई स्टेटमेंट नहीं बनता, हर काम कंप्यूटर पर करे फिर उसे मैनुअल करे, ऐसी व्यवस्था पूरे देश के अन्य किसी विभाग में नहीं अन्य विभागों में कंप्यूटर पर फाइल की फीडिंग होते ही सारे स्टेटमेंट और रजिस्टर अलग अलग तैयार माह के अन्त में प्रिंट करके रख लो
अंदरूनी कार्यशैली यह है कि तत्काल शब्द most urgent इससे नीचे कुछ होता ही नहीं सब तत्काल करना है, फिर रोज का काम करना है वह भी तत्काल क्योंकि वादकारी और अधिवक्ता सुबह से लगे रहते है
कभी कभी जज साहब का व्यवहार ऐसा होता है कि वो खुद को बादशाह और कर्मचारी को रियाया समझते है तब स्थिति और दुश्वार हो जाती है।
हमारा कोई पुरसा हाल नहीं
क्योंकि हमे अपनी स्थिति के बदलाव की आशा भी छूट गई है।
ऐसा नहीं है बदलाव आएगा
बस एक कदम और